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नवी मुंबई
नवी मुंबई के कामोठे में तेज रफ्तार स्कोडा कार ने सात लोगों को कुचल दिया। इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल  हो गए। मृतकों में एक सात साल के बच्चे का समावेश है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। फिलहाल दुर्घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी कार चालक वाहन मौके पर  ही छोड़कर फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक कार चालक नशे में धुत था, उसकी सरगर्मी से खोजबीन की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार रविवार की शाम नवी मुंबई के कामोठे सेक्टर-6 में तेज रफ्तार स्कोडा कार की चपेट में आने से सात वर्षीय सार्थक चोपडे और 32 वर्षीय वैभव गुरव की मौत हो गई। जब कि सार्थक चोपडे की मां साधना चोपडे  (30), श्रध्दा जाधव (31), शिफा (16), आशिष पाटील (22) और प्रशांत माने गंभीर रूप से घायल हो गए। रविवार की शाम कामोठे सेक्टर 6 रयत शिक्षण संस्था स्कूल के पास स्थित  सरोवर होटल के फुटपाथ के पास तेज रफ्तार स्कोडा कार आई। इस दौरान कारसे ड्राइवर का नियंत्रण छूट गया और डिवाइडर से कार टकरा गई। इसके बाद ड्राइवर कार पीछे की  तरफ ले जाते हुए सात लोगों को कुचल दिया। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जब कि पांच लोग घायल हो गए। घायलों को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब  कि घटना के बाद से फरार स्कोडा कार चालक के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जुट गई।
दुर्घटना के बाद फरार कार चालक हरविंदर सिंह हरभजन सिंह (75) पनवेल के लाइफ लाइन अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हो गया। इसकी भनक लगते ही पुलिस अस्पताल  पहुंच गई और उसकी निगरानी में उपचार चल रहा है। उसके ठीक होते ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बताया गया कि आरोपी कार चालक कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित है।

भिवंडी
भिवंडी तहसील के टेंभवली में डेंगू के बढते प्रकोप के कारण नागरिकों में भय का वातावरण फैला हुआ है । बरसात के मौसम में चारों ओर बीमारी से लोग पीड़ित हैं, जिसमें बुखार,  मलेरिया आदि बीमारियों का प्रकोप शुरु है। सरकारी अस्पताल सहित निजी अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक है। इसी क्रम में टेंभवली के सुशांत सुधाकर नांदुरकर (32) नामक युवक को डेंगू की बीमारी होने के कारण उसे शहर के अल मोमिन नामक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डेंगू जैसी महाभयंकर बीमारी फैलने के बाद भी भिवंडी पंचायत  समिति के अंतर्गत आने वाले सरकारी यंत्रणा ध्यान नही दे रही । जिला परिषद के संबंधित विभाग के विरुद्ध नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

ठाणे
वागले इस्टेट औद्योगिक परिसर में अतिक्रमण का शिकार हुए भूखंड को क्लस्टर के लिए उपलब्ध कराने तथा परिसर का समूह विकास करते इस स्थान पर विविध विकास कामों को  मान्यता दिलाने ठाणे जिले के पालकमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को उद्योगमंत्री सुभाष देसाई से भेंट की और उक्त मुद्दों पर चर्चा की। बातचीत में कहा गया कि समूह विकास के  लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल सहयोग करेगा। देसाई के आश्वासन के बाद ठाणे  वागले इस्टेट परिसर तथा औद्योगिक कलोनी के विकास के मार्ग प्रशस्त हुआ है।  मंत्रालय में पालकमंत्री शिंदे की अगुवाई में उक्त मुद्दे को लेकर बैठक का आायोजन किया गया, जिसमें ठाणे मनपा आयुक्त संजीव जायसवाल के साथ ही एमआईडीसी के अधिकारी  भी उपस्थित थे। शिंदे ने कहा कि वागले इस्टेट सबसे पुरानी औद्योगिक कालोनी है। यहां अनेक इमारत खतरनाक हो चुकी है। कई स्थानों पर अतिक्रमण हुए हैं। जबकि ठाणे मनपा  ने समूह विकास के लिए अ्गुवाई की है। यहां के लिए विस्तारीकरण को मंजूरी दे दी गई है। जिसके कारण वागले परिसर में 30 से 40 चौड़े मार्ग बनेंगे।
साथ ही जोड़ मार्ग भी 18 मीटर चौड़े बेनेंगे। एमआईडीसी की अतिक्रमित जमीन क्लस्टर के लिए उपलब्ध कराने को मान्यता मिली है। वागले परिसर में एमआईडीसी का 78 एकर  जमीन है। यहां विकास काम किए जाएंगे। उक्त जमीन ठाणे मनपा को हस्तांतरित किया जाएगा। जबकि मनपा हस्तांतरित जमीन का 12 प्रतिशत भूखंडे एमआईडीसी को उपलब्ध  कराएगा। इसके साथ ही ठाणे मनपा आयुक्त संजीव जायसवाल ने कहा कि उक्त जमीन पर भव्य वाहनतल, अस्पताल बनेंगे। मनपा परिसर के मार्गो का विस्तारीकरण करेगी।

भिवंडी
भिवंडी तहसील के अंबाड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत उंबरा पाड़ा में बिजली गिरने से मृतक युवती प्रमिला वाघे के परिवार वालों को सरकार की तरफ से 4 लाख रुपए का चेक  भिवंडी तहसीलदार शशिकांत गायकवाड के हाथों प्रदान किया गया । इस अवसर पर श्रमजीवी संगठन के तालुका अध्यक्ष सुनील लोने, शहर अध्यक्ष सागर देसक, नारायण जोशी,  तानाजी लहंगे, जयेश पाटील, लक्ष्मी मुकने, गुरुनाथ वाघे, महेंद्र निरगुड़ा, तुलसीराम साबले आदि कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित थे। गौरतलब है कि भिवंडी तालुका के अंतर्गत  अंबाड़ी ग्राम पंचायत के उंबरा पाड़ा क्षेत्र में 20 जुलाई की शाम बिजली गिरने से प्रमिला बाघे (19) नामक मजदूर युवती की मृत्यु हो गई थी। वहीं उसके पिता मंगल्या वाघे, मां  मंजुला वाघे, अलका वाघे तथा 4 वर्षीय विजय गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।

  • ˜तोरई के छिलके और आलू के छिलकों को तलकर उस पर नमक, मिर्च स्वादानुसार डालकर गर्मागर्म शाम को स्नैक के रूप में चाय के साथ खाएं।
  • ˜आलू के चिप्स काटकर हल्दी लगायें और नमक मिले पानी में डाल दें। इस पानी में दो-चार बूंद नींबू का रस मिला दें। 10 मिनट बाद निकाल कर पोंछकर सुखा लें। ये चिप्स सफेद  और खस्ता बनेंगे।
  • करी पत्तों को नारियल के तेल में उबालकर छान लें। इस्तेमाल करने से बाल सफेद नहीं होंगे।
  • अधिक मीठी या तली भुनी चीज खाने से कई बार पेट फूलने लगता है या फिर खट्टी डकारें आने लगती हैं। ऐसे में 5 काली मिर्च के साथ 10 पोदीने की पत्तियों को मुंह में रखकर  धीरे-धीरे चबायें। आराम मिलेगा।
  • यदि कपड़े पर चिकनाई या घी तेल के दाग पड़ जायें तो कपड़े पर टैलकम पाउडर छिड़कें। ऊपर से उस पर अखबार और कोई भारी वस्तु रख दें। चिकनाई अखबार पर आ जाएगी।
  • पिसी हुई लाल मिर्च में थोड़ा पिसा हुआ नमक मिलाकर रख देने से वह कई महीनों तक खराब नहीं होती। बरसात में कीड़े भी नहीं पड़ते।
  • पनीर बनाने के बाद जो पानी शेष बच जाता है, उससे आटा गूंथें। इससे रोटी परांठा अधिक खस्ता बनता है। इस पानी को दाल बनाते समय भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
  • दूध को उतारकर कस्टर्ड पाउडर डालें और मिलाकर फिर उबालें। इससे गांठें नहीं पड़ेगी।
  • आलू की पतली फांक आंखों पर रखने से आंखों की थकान दूर होती है।
  • उल्टी से बचने के लिए पोदीने की टहनियों को चूसें।
  • यदि कैंची की धार खराब हो गई हो तो कैंची को किसी कांच की बोतल पर काटने की मुद्रा में चलायें। धार अच्छी हो जाएगी।
  • रस निकले नींबू के छिलकों को रात में एक मग में भिगो दें। अगले दिन उसे बाल्टी में डालकर नहाएं। शरीर में भीनी-भीनी खुशबू आएगी और त्वचा भी मुलायम होगी।
  • श्रीखंड बनाते समय दही से निकले हुए पानी को न फेंकें। उस पानी से आप चावल बना सकते हैं या उस पानी को आप दिनभर लस्सी की तरह पी सकते हैं।
  • कस्टर्ड को खट्टा करने के लिए संतरा या अंगूर काटकर डालें।
  • त्वचा पर दही का लेप करने से त्वचा की टोनिंग होती हैं
  • गैस बनने की अवस्था में मिश्री के साथ पोदीने की आठ-दस पत्तियां चबाकर खायें। पेट हल्का रहेगा, भूख भी खुलकर लगेगी।
  • यदि कपड़े पर बाल पेन की स्याही का दाग पड़ गया हो तो नेलपालिश रिमूवर लगा दें। दाग छूट जायेगा।
  • दूध उबालते समय पतीले में कलछी डाल दें। दूध उबलकर बाहर नहीं आयेगा।
  • चावल की खीर बनाते समय चावलों को पहले घी में थोड़ा भून लें। खीर बरतन में चिपकेगी नहीं।
  • चावल उबालने के बाद बचे हुए पानी से सूती कपड़ों पर कलफ लगाएं।
  • मैदा को प्लास्टिक बैग में डालकर फ्रिज में रखें। यह महीनों खराब नहीं होगा।
  • शहद एवं दही समान मात्र में मिलाकर चेहरे एवं गर्दन पर लगाने से झुर्रियां दूर होती है।
  • मुख की दुर्गंध दूध करने के लिए पोदीने की पत्तियों को गर्म पानी में खूब उबालें। जब काढ़ा ठंडा हो जाये तो कुल्ला व गरारा करें। मुंह को ताजगी भी मिलेगी, महक भी आने लगेगी।
  • फ्रिज में बर्फ की ट्रे चिपक जाती है। ट्रे को रखने से पहले उसके तले पर मोमबत्ती रगड़ें, ट्रे चिपकेगी नहीं।
  • चमड़े के फर्नीचर पर लगे दाग आफ्टर शेव लोशन से साफ करें। ये बिल्कुल खत्म हो जायेंगे और फर्नीचर का चमड़ा भी खराब नहीं होगा।
  • सोने के जेवरों में चमक जाने के लिये उन्हें एक घंटे तक पानी में सिरका डालकर डुबो दें। बाद में ब्रश से साफ कर दें।

- मीना जैन छाबड़ा

अनेक रोगों से मुक्ति के लिए तथा उन्हें नियंत्रित रखने के लिए हास्य एक अनुपम औषधि है। यह जरूरी है कि आप सही ढंग से हंसें और स्वस्थ रहें। आप अपने को रोगी अनुभव  करते हैं, इसकी वजह यह है कि आपके कहकहे खो गए हैं-एक बार ठहाका लगायें, उन्मुक्त रूप से हंसें। आप भला चंगा अनुभव करने लग जायेंगे। वैज्ञानिक प्रयोगों से साबित हो  चुका है कि हृदयरोग, रक्तचाप(बी.पी.) दमा, मानसिक उत्तेजना, अवसाद (डिप्रेशन) अनिद्रा आदि अनेक रोगों में खिलखिला कर हंसने से यथेष्ट लाभ होता है।
यह विदित तथ्य है कि योगसाधन या प्राणायाम के अंतर्गत श्वास-प्रश्वास की क्रि या को संतुलित करने का अभ्यास किया जाता है। इसके द्वारा पेट के ऊपरी हिस्से अर्थात् 'डायफ्राम'   को संचालित किया जाता है। हंसने से यह क्रि या स्वत: संचालित हो जाती है और व्यक्ति प्रफुल्लित अनुभव करने लगता है। यह अनुसंधानों से प्रमाणित हो चुका है कि मानसिक  उत्तेजना तथा रक्तचाप में उन्मुक्त हास्य लाभदायक होता है। सुमधुर हास्य से अवसाद और अनिद्रा जैसे रोगों में भी लाभ पहुंचता है।

हँस कर गुस्सा भगायें

क्रोध कई  परेशानियों की जड़ है किंतु हंसने से क्रोध  काफूर हो जाता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। शोक और वेदना की स्थिति में भी हंसी एक रामबाण दवा की तरह है क्योंकि हंसने से शोक और वेदना में कमी होती है। आजकल कई स्थानों में पार्कों या बाग-बगीचों में ऐसे €लब हैं जहां कई लोग एकत्र होकर जोरों से हंसते हैं या बैठ कर ठहाके लगाते  हैं। यह भी प्रात:कालीन व्यायाम का एक हिस्सा है जिससे तनाव कम होता है और लोग ताजगी का अनुभव करते हैं।
हास्य क्रिया से श्वास-प्रश्वास की गति बढ़ती है जिससे फेफड़ों में अधिक आक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता आती है। इस वजह से श्वास संबंधी रोग नहीं होते और व्यक्ति स्वस्थ   तथा हल्का अनुभव करता है। जब हम हंसते हैं तो उसका तत्काल प्रभाव हमारे मुखमंडल पर होता है, इससे चेहरे की मांसपेशियों में रक्तसंचार बढ़ जाता है। इस कारण हंसते रहने   से व्यक्ति के चेहरे की कांति बढ़ जाती है। कैंसर जैसे रोगों में लाभप्रद:हास्य व्यक्ति के मानसिक तनावों को तो दूर करता ही है, यह पेट पर और आंतों पर भी दबाव उत्पन्न करता   है जिससे कफ, पित्त के विकारों को दूर करने में मदद मिलती है। हंसने की क्रि या से कफ और पित्त की मात्र घट जाती है, जिससे एसिडिटी संबंधी रोगों में राहत मिलती है। यह  पता चला है कि कैंसर रोग का एक प्रमुख कारण रक्त में निर्धारित मात्र से अधिक संख्या में श्वेत रक्त कणों (डŽल्यू बीसी) का होना है। हास्य से शरीर में तथा रक्त संचालन की  प्रणाली में प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है, जिससे कैंसर जैसे रोगों से भी बचाव हो सकता है। मधुर हास्य से लोगों का स्नेह सौजन्य तो मिलता ही है, आपके शारीरिक सौंदर्य तथा स्वास्थ्य में भी वृद्धि होती है। इसलिए आज, आज और अभी से हंसना आरंभ करें जिससे आप को तथा आपके अपनों को लाभ मिलता रहेगा।

आज के आधुनिक और वैज्ञानिक युग ने जहां हमारे जीवन को अत्यंत सुखदायी व गतिशील बना दिया है, वहीं प्रतिदिन दुर्घटनायें न जाने कितनों के प्राण लेती हैं और कितने ही  अपनी प्राण-रक्षा के लिये हस्पतालों में जीवन रूपी सांसों से संघर्ष कर रहे होते हैं। दूसरी ओर अनभिज्ञता, प्रदूषण और गिर रहे नैतिक मूल्यों के परिणामस्वरूप एक से बढ़कर एक  घातक बीमारी ने लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। बहुतसी बीमारियां जिनको हमने पहले कभी सुना भी न था, आज विकराल रूप धारण कर चुकी हैं जैसे कैंसर,  एड्स, डेंगू, ड्राप्सी, हैपेटाइटस आदि। इन बीमरियों, दिनप्रतिदिन की दुर्घटनाओं और कई बड़े आप्रेशनों के लिये भारत में प्रतिवर्ष 80,00,000 यूनिट से भी अधिक रक्त की आवश्यकता  पड़ती है और स्वैच्छिक रक्तदाताओं से केवल एक चौथाई यूनिट रक्त ही जुट पाता है। आप आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि कितने रोगी प्रतिवर्ष केवल समय पर रक्त न  मिलने के कारण ही प्राणों से अकारण हाथ धो बैठते हैं।
प्रत्येक समय हर ब्लड गु्रप की निरंतर आवश्यकता रहती है। हमें हमेशा अपने आप को रक्तदान के लिये तैयार रखना चाहिए क्योंकि इंसान को केवल इंसान का ही रक्त दिया जा  सकता है। एक स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 16 से 60 वर्ष और वजन 45 कि.ग्रा. से अधिक हो, प्रत्येक तीन महीने बाद आसानी से रक्तदान कर किसी को जीवनदान दे सकता है।  आमतौर पर यह सुनने को अक्सर मिलता है कि मुझ में तो रक्त की कमी है, मैं कैसे रक्त दे सकता हूं?
रक्तदान करने से पहले रक्त की कमी के लिये आपकी जांच की जाती है और उसके बाद उचित मात्रा में रक्त पाये जाने पर ही रक्तदान करवाया जाता है। रक्तदान में केवल 5   से 10 मिनट तक लगते हैं। इससे शरीर पर किसी तरह का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। हम रक्तदान के बाद अपने सारे कार्य दिनचर्या अनुसार पुन: आम दिनों की भांति ही कर  सकते हैं। बस एक बार अपने मन को तैयार करने की आवश्यकता है, फिर आपका भय दूर हो जायेगा। यहां पर इस बात का ध्यान रखना अति अनिवार्य है कि स्वैच्छिक रक्तदान  से अधिक सुरक्षित स्वैच्छिक रक्तदान पर बल देने की अधिक जरूरत है।

- महेश कुमार शर्मा

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