सात राज्यो ने बदली परीक्षा तिथी, बिहार मे क्यो नही?

पटना - पूर्व उपमु यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि सात राज्यों ने यूपीएससी परीक्षा को देखते हुए राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा तिथि को बदल दिया है, फिर बिहार में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए। बिहारी छात्रों ने बीपीएससी की 56 वीं से 59 वीं मु य परीक्षा की तिथि बढ़ाने की मांग की है जिसे सरकार लगातार अनसुना कर रही है। मोदी ने कहा कि 8 से 30 जुलाई तक बीपीएससी की मु य परीक्षा की तिथि तय की गई है, जबकि यूपीएससी पीटी की परीक्षा 7 अगस्त को होने वाली है। यूपीएससी की परीक्षा में बिहार से हजारों छात्र शामिल होते हैं। दोनों परीक्षाओं का पैटर्न अलग-अलग है, इसलिए महज सात दिन में छात्रों के लिए यूपीएससी पीटी की तैयारी करना संभव नहीं है। 
ऐसे भी पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी में बिहारी छात्रों का प्रदर्शन गिरा है। अगर तिथि नहीं बढ़ाई गई तो इस बार रिजल्ट और खराब हो सकता है। मोदी ने कहा कि बीपीएससी की परीक्षाओं में विलंब कोई छात्रों के कारण नहीं बल्कि सरकार के विफलता की वजह से हुई है। जब बीपीएससी प्रारंभिक की चार विलंबित परीक्षा संयुक्ततौर पर पिछले साल 15 मार्च को ली गई और परिणाम 8 महीने बाद 21 नवंबर को जारी किया गया तो फिर मुख्य परीक्षा आयोजित करने में 8 महीने की देरी क्यों की गई? क्या इसके लिए परीक्षार्थी जिम्मेवार हैं? एक हजार छात्रों के रौल नंबर और हस्ताक्षर के साथ आवेदन देने पर परीक्षा की तिथि बढ़ाने के बीपीएससी के चेयरमैन के आश्वासन के बाद 1500 छात्रों द्वारा ज्ञापन दिया गया। बावजूद सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है। मालूम हो कि यूपीएससी की परीक्षा में चार मौका ही निर्धारित है। बिहार के ऐसे हजारों छात्र हैं, जिनकी यूपीएससी के लिए इस साल अंतिम मौका है। अगर सरकार जिद पर अड़ी रही और बीपीएससी मुख्य परीक्षा की तिथि नहीं बढ़ाई गई तो इन हजारों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जायेगा।
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