माल्या को भारत लाने का रास्ता साफ

बैंकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने की उम्मीद बढ़ गई है। यूके सरकार की तरफ से माल्या को तगड़ा झटका लगा है। यूके  होम सेक्रेटरी साजिद जाविद ने सोमवार को माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। इसे भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। होम ऑफिस की ओर से  बताया गया है कि विजय माल्या औपचारिक रूप से अभी अपील कर सकते हैं। अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करने के लिए माल्या के पास 14 दिनों का समय है।
बता दें कि किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे माल्या पर 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग का आरोप है। इससे पहले माल्या दिसंबर में ही ब्रिटेन की एक  अदालत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी केस हार गया था। तब कोर्ट ने उसे भारत के हवाले करने की अनुमति दे दी थी। ब्रिटेन की अदालत ने कहा था कि वह भारत सरकार  की ओर से दिए गए विभिन्न आश्वासनों से संतुष्ट है, जिसमें जेल की एक सेल का वीडियो भी शामिल था।
मैजिस्ट्रेट का फैसला होम सेक्रेटरी के पास गया था : दरअसल, प्रत्यर्पण संधि की प्रक्रियाओं के तहत चीफ मैजिस्ट्रेट का फैसला होम सेक्रेटरी के पास भेजा गया था, क्योंकि माल्या के  प्रत्यर्पण आदेश को जारी करने का अधिकार उनके पास ही है। ब्रिटेन में रह रहा शराब कारोबारी पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर है। ऐसा लगता है कि माल्या को अपने खिलाफ ऐक्शन का कुछ दिन पहले ही आभास हो गया था।
हाल में बदल गए थे माल्या के सुर : शायद इसी वजह से माल्या के सुर  बदल गए थे। हाल में माल्या ने अपनी दलील में ट्वीट कर दावा किया था कि उनकी कंपनी की 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब़्त की जा चुकी है। माल्या ने यह भी कहा था कि उसे कर्ज देने वाले बैंक ने इंग्लैंड में अपने वकीलों को उनके खिलाफ छोटे-मोटे मामले दर्ज  करने की खुली छूट दी हुई है। माल्या अपने खिलाफ मामले को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। माल्या ने कहा था कि मैंने एक भी पैसे का कर्ज नहीं लिया। कर्ज किंगफिशर  एयरलाइंस ने लिया। कारोबारी विफलता की वजह से यह पैसा डूबा है। गारंटी देने का मतलब यह नहीं है कि मुझे धोखेबाज बताया जाए।
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