शिवसेना से युति के शिल्पकार देवेंद्र फड़नवीस

भाजपा और शिवसेना के बीच युति की घोषणा ने विपक्षी दल सहित कई लोगों को चौंका दिया। भाजपा और शिवसेना के बीच युति होगी या नहीं? इस यक्ष प्रश्न का सीधा जवाब  किसी के पास नहीं था। युति को लेकर तरह-तरह की अटकलबाजियां हवा में उड़ रहीं थीं। शिवसेना के तेवर और आए दिन 'सामना’ में सरकार के कामकाज पर हो रही तीखी टीका- टिप्पणी को देखकर सभी को लगता था कि भाजपा और शिवसेना बातचीत के लिए एक टेबल पर कभी नहीं आ पाएंगी, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसी हवा चली कि सभी को लगने लगा  कि लोकसभा चुनाव के पहले शिवसेना-भाजपा में गठबंधन को लेकर कोई खिचड़ी पक रही है। आखिरकार दोनों दलों में गठबंधन हुआ और सभी अवाक रह गए, क्योंकि इस गठबंधन  के सच्चे शिल्पकार के रूप में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का चेहरा लोगों के सामने उभरकर आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के साथ गठबंधन की पूरी जिम्मेदारी राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को सौंप दी थी। ऐसे हालात में  शिवसेना के साथ युति के कठिन टास्क को पूरा करना उनके लिए बेहद जरूरी था। युति को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस सीधे शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे से बातचीत कर रहे  थे। दरअसल शिवसेना में कई ऐसे नेता मौजूद हैं, जो युति के पक्षधर नहीं थे। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच बातचीत का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया जा रहा था।
दस जनवरी को जब राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने सवाल खड़ा किया कि शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे रात के वख्त मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मिलने सोफिटेल  होटल क्यों गए थे, तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ कि सीएम और उद्धव ठाकरे के बीच युति को लेकर सीधी बातचीत चल रही है। हालांकि न तो भाजपा और न ही शिवसेना  की तरफ से राकांपा अध्यक्ष के सवाल का जवाब देने की कोशिश की गई। सूत्रों के अनुसार सीएम और उद्धव ठाकरे के बीच युति को लेकर कई दौर की बातचीत हुई और आखिरकार  युति पर मुहर लग गई। सेना की लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने तथा शिवसेना का मुख्यमंत्री की मांग को मंजूर किए बिना देवेंद्र फड़नवीस युति कराने में सफल रहे।  एक दौर था जब शिवसेना और भाजपा के बीच किसी तरह के मतभेद उभरने पर शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के पास भाजपा के नेता प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे पहुंचते  थे। इन तीनों नेताओं के बीच कठिन से कठिन मुद्दों पर भी सहमति बन जाती थी, लेकिन आज ये तीनों नेता नहीं है। जब शिवसेना और भाजपा के बीच गठबंधन की गांठ बांधने की  जिम्मेदारी आई तो भाजपा की तरफ से देवेंद्र फड़नवीस को आगे किया गया। देवेंद्र फड़नवीस ने सीधे शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे से बात कर मामले को सुलझा लिया और दोनों  दल फिर से एक बार दोस्त बन गए। इस घटना के बाद न केवल विपक्षी, बल्कि सफा पक्ष के लोग भी आश्चर्यचकित हैं। खुद को मराठा क्षत्रप कहलाना पसंद करने वाले शरद पवार  को भी सीएम ने सन्न कर दिया है। कांग्रेस और राकांपा के कई नेता हैं, जो युति के शिल्पकार देवेंद्र फड़नवीस को मानने को मजबूर हुए हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना  है कि ऐसे माहौल में सीएम का सियासी कद काफी ऊंचा हो गया है।

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