तेजस्वी के लिये "बंग्ला" बना चक्रव्युह

पटना
तेजस्वी यादव ने कोर्ट के आदेश के बाद अपने सरकारी बंगले को भले ही खाली कर दिया हो, लेकिन उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब विरोधी दल इस बंगले के  जरिए न सिर्फ उन्हें घेरने की कोशिश में है, बल्कि इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में भी जुट गई हैं। यही कारण है कि नीतीश सरकार ने अपने विभाग को बंगले के खर्च का  एक-एक चीज का हिसाब करने का आदेश दिया है। तेजस्वी का बंगला अब 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा बनने वाला है। विरोधियों ने बंगले के मुद्दे पर तेजस्वी को घेरने  के लिए एक मजबूत चक्रव्यूह बना लिया है। इस चक्रव्यूह में न सिर्फ तेजस्वी को उलझाने की तैयारी है, बल्कि जनता के बीच यह संदेश भी दिया जाएगा कि जिस गरीबी और समाजवाद के नाम पर तेजस्वी और उनकी पार्टी सियासत करती है, वह जनता के साथ धोखा है। विरोधियों की माने तो तेजस्वी गरीबी को चोला ओढ़कर जनता की आंखों में धूल  झोंकने का काम कर रहे हैं। यही वजह है कि वे पांच सीतारे होटल की तरह बंगले को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे। जानकारी के मुताबिक, भवन निर्माण विभाग को यह टास्क  मिला है कि तेजस्वी के बंगले में हुए खर्च का बहुत जल्द ब्यौरा दिया जाए। मतलब साफ है चुनाव से पहले बंगले के खर्च का एक-एक चीज का हिसाब करने के बाद जनता के बीच इसे उजागर किया जाएगा। ये हम नहीं खुद नीतीश कुमार के करीबी और विभाग के मंत्री महेश्वर हजारी बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता आने वाले समय में तेजस्वी यादव को  जवाब दे देगी। हालांकि, इससे पहले तेजस्वी को भी इस बात का एहसास हो गया है कि नीतीश सरकार बंगले के जरिए उनके खिलाफ कोई बड़ी रणनीति बना रही है। शायद यही  कारण है कि तेजस्वी ने सफाई देते हुए कहा कि हमने एक भी सरकारी सामान अपने साथ नहीं ले गया।
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