तेलतुंबडे को मिली राहत

मुंबई
पुणे पुलिस ने बंबई उच्च न्यायालय को मंगलवार को बताया कि वह सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबड़े को 12 फरवरी की मध्यरात्रि तक गिरफ्तार नहीं करेगी। वहीं,
दलित विद्धान ने इस मामले को उन्हें 'अपमानित’ और 'प्रताडि़त’ करने के इरादे किया गया कार्य बताया है। पुणे पुलिस की ओर से पेश हुईं राज्य की वकील अरुणा पाई ने न्यायमूर्ति  एनड ल्यू सांबरे की पीठ के समक्ष यह बयान दिया। अदालत एल्गार परिषद भीमा-कोरेगांव मामले में अग्रिम जमानत के लिए तेलतुंबड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। तेलतुंबड़े  मामले में आरोपी है। पुणे के भीमा-कोरेगांव गांव में एक जनवरी 2018 को हिंसक झड़प की घटना के बाद यह मामला दर्ज किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम  अधिनियम (यूएपीए) की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। तेलतुंबड़े की याचिका के खिलाफ हलफनामा दायर करने के लिए समय का अनुरोध कर रहीं पाई को न्यायमूर्ति सांबरे ने मंगलवार पूर्व शर्त के तौर पर मौखिक आश्वासन देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस याचिका पर अब 11 फरवरी को आगे सुनवाई होगी। बाद में तेलतुंबड़े ने  उनके एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस के मामले को उन्हें 'प्रताडि़त’ और 'अपमानित’ करने के इरादे से किया गया कार्य बताया। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा,  पुलिस मामले में जांच नहीं करना चाहती, वह सिर्फ हमें प्रताडि़त और अपमानित करना चाहते हैं। मैं लंबे समय से जांच में सहयोग कर रहा हूं। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मुझे  अचानक गिरफ्तार करने का कदम क्यों उठाया गया। तेलतुंबड़े को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था और अदालत के आदेश के एक दिन बाद शनिवार (दो फरवरी) को उन्हें रिहा कर दिया गया था। सोमवार को उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी कि मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। मंगलवार को याचिका पर सुनवाई  के दौरान वकील पाई ने न्यायमूर्ति सांबरे से इस आधार पर तेलतुंबड़े की अर्जी खारिज करने का अनुरोध किया कि यूएपीए की धारा 43 डी (4) आरोपी को अग्रिम जमानत की  इजाजत नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल की शुरुआत में तेलतुंबड़े ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इंकार करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दी थी और अनुरोध  किया था कि मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की जाए। पुलिस का दावा है कि तेलतुंबड़े के माओवादियों से संपर्क हैं। हालांकि एक अन्य पीठ ने यह याचिका खारिज कर  दी थी। पाई ने कहा, उनके खिलाफ सभी सबूतों पर गौर करने के बाद उच्च न्यायालय की पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। यह भी उनकी इस अग्रिम जमानत याचिका को खारिज  करने का ठोस आधार है। तेलतुंबड़े के वकील मिहिर देसाई ने 'विशिष्ट मामलों’ में यूएपीए के तहत अग्रिम जमानत के लिए मौजूद कानून के बारे में बताया। इस पर पाई ने अदालत  से अनुरोध किया कि उन्हें हलफनामा दायर करने के लिए और समय दिया जाए। तेलतुंबड़े को 12 फरवरी तक गिरफ्तार नहीं किए जाने के पाई के आश्वासन के बाद न्यायमूर्ति  सांबरे ने उन्हें हलफनामा दायर करने के लिए नौ फरवरी तक का समय दिया। तेलतुंबड़े को बीते शनिवार को तड़के करीब तीन बजे मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। हरहाल सत्र अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध माना और उन्हें हिरासत से रिहा कर दिया था।
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