चीन से आने वाले दोपहिया अलॉय व्हील पर न्यूनतम आयात मूल्य तय करने की मांग

नई दिल्ली
वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं ने सरकार से दोपहिया वाहनों के लिए चीन से आने वाले एल्युमीनियम के पहिए (अलॉय व्हील) का न्यूनतम आयात मूल्य तय करने की मांग की है।  उनका कहना है कि इससे घरेलू उद्योग को दि€कतों का सामना करना पड़ रहा है। कलपुर्जा उद्योग के शीर्ष संगठन ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैनुफै€चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए)  ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु को लिखे पत्र में कहा कि चीन सरकार द्वारा अपने उद्योग को सब्सिडी देने के चलते घरेलू विनिर्माताओं को प्रतिस्पर्धा करने और सतत  कारोबार मॉडल को बनाए रखने में दि€कतों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने सरकार से इस दि€कत को दूर करने के लिए दोपहिया वाहनों में इस्तेमाल होने वाले एल्युमीनियम के पहिए पर तीन साल के लिए न्यूनतम आयात मूल्य लगाने का  अनुरोध किया है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते अगले इस मामले को प्रभु के सामने उठा सकते हैं। इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य एवं  उद्योग मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि दुपहिया वाहनों के अलॉय व्हील्स के घरेलू निर्माताओं को हो रही दि€कतों को सरकार के संज्ञान में लाया गया है।  भारत दुनिया का सबसे बड़ा दोपहिया वाहन बाजार है। देश में दोपहिया वाहन बिक्री 2016-17 में 1,75,89,738 इकाई से 14.8 प्रतिशत बढ़कर 2017-18 में 2,01,92,672 इकाई हो  गई है। एसीएमए के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के लिए हर साल करीब 3.5 करोड़ अलॉय व्हील की जरूरत होती है, जिसमें से केवल 1.3 करोड़ पहिए घरेलू विनिर्माताओं द्वारा  उत्पादित किए जाते हैं जबकि बाकि बचे करीब 2.2 करोड़ पहियों का आयात किया जा रहा है। यह आयात खासकर चीन से किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने थाईलैंड ,कोरिया और चीन से आयातित चार पहिया वाहनों के एलॉय व्हील पर पांच साल के लिए डंपिंग-रोधी शुल्क लगाया है। यह शुल्क 10 अप्रैल  2019 तक वैध है। व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने 10 अगस्त , 2018 को शुल्क की समीक्षा जांच शुरू की है। यह जांच चल रही है और 9 अप्रैल, 2019 से पहले इसे  अंतिम रूप दिया जाना है। एसीएमए पहले भी दोपहिया वाहनों में इस्तेमाल पहियों को भी इस समीक्षा में शामिल करने का अनुरोध कर चुका है। सूत्रों ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय  का मानना है कि यह मांग कानूनी रूप से उचित नहीं है और उद्योग प्रतिनिधियों को डीजीटीआर के समक्ष डंपिंग रोधी शुल्क लगाने के लिए औपचारिक आवेदन जमा करना चाहिए।  न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) घरेलू किसानों और उद्योग को आयात की बाजार खराब करने वाली कीमतों से बचाने के लिए एक अस्थाई उपाय है।
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