आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी पर 22 मार्च तक रोक

मुंबई
बंबई हाईकोर्ट ने मंगलवार को दलित स्कॉलर आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी से पहले की राहत को 22 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया। इसका मतलब है, पुणे पुलिस, जो भीमा-कोरेगांव  हिंसा मामले की जांच कर रही है, आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तार नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति प्रदीप देशमुख की पीठ ने अग्रिम जमानत के लिए उनके आवेदन पर सुनवाई करते हुए  आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तारी से राहत दी। पुणे पुलिस द्वारा अवैध रुप से गिरफ्तार किए जाने और बाद में रिहा होने के बाद, फरवरी के पहले सप्ताह में आनंद तेलतुंबड़े ने अपना  केस स्थानांतरित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें दी गई राहत के मद्देनजर और सेशन कोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया  था।
शीर्ष अदालत ने पुलिस को कम से कम 11 फरवरी तक तेलतुंबडे को गिरफ्तार न करने के लिए कहा था, इसके साथ ही कोर्ट ने सहा था की उन्हे आगे की राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बंबई हाई कोर्ट से मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा की उस याचिका पर आठ सप्ताह के भीतर  फैसला करने को कहा, जिसमें 2017 के कोरेगांवभीमा मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट और बंबई हाईकोर्ट  के आदेशों के खिलाफ दायर महाराष्ट्र सरकार की दो अपीलों को लंबित रखा है।

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