40 सीटों पर इस बार दिलचस्प मुकाबला

पटना
बिहार में लोकसभा चुनाव में एनडीए का चेहरा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे। एनडीए की स्टार प्रचारकों की टीम में पीएम मोदी व लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान भी प्रमुख तौर  पर रहेंगे। लेकिन, राज्य में हुए विकास कार्य व मुख्यमंत्री की छवि को आधार बना कर एनडीए चुनाव मैदान में उतरेगा। बिहार की 40 सीटों पर इस बार दिलचस्प मुकाबला होने  वाला है। 2014 के मुकाबले बिहार में इस बार तस्वीर बदली हुई है। 2014 में भाजपा व जदयू अलग-अलग चुनाव लड़ी थी। इस बाद दोनों ही पार्टियां एक साथ एनडीए के मंच पर  खड़ी है। भाजपा ने अपने बराबर की सीटें जदयू को दी है। उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा इस बार एनडीए से बाहर हो गई है। उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन के साथ खड़े हैं। उनके साथ  पार्टी के एक सांसद रामकुमार शर्मा भी हैं। दूसरा खेमा जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार का है। अरुण कुमार ने अपनी अलग पार्टी बना ली है। चुनाव आयोग ने उन्हें अलग चुनाव  चिह्न भी आवंटित कर दिया है।
तीसरा खेमा रालोसपा के दो विधायकों की है, यह खेमा जदयू के साथ खड़ा है। रालोसपा में रहे और उपेंद्र कुशवाहा को राज्य का अगला मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजे€ट करने वाले पूर्व  केंद्रीय मंत्री नागमणि ने भी उनका साथ छोड़ दिया है। नागमणि ने जदयू के साथ आने का संकेत दिया है। फिलहाल एनडीए के साथ जदयू के अलावा लोजपा मजबूती के साथ खड़ी  दिख रही है। दूसरी ओर महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा और सन ऑफ मल्लाह के आने से विरोधी कुनबा अपने को दमदार मान रहा। महागठबंधन के साथ जीतनराम मांझी और  भाकपा-माले भी होगी। पिछले 43 सालों में पहली बार ऐसा मौका होगा, जब चुनावी परिदृश्य से राजद अध्यक्ष लालू बाहर होंगे। उनके वकीलों ने जमानत याचिका दाखिल की है। उन्हें  जमानत मिल भी गई, तो चुनाव प्रचार करने की इजाजत मिलेगी या नहीं, यह कोई नहीं जानता।
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