आतंक की नई चाल

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के बयालीस जवानों के मारे जाने के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा बलों को सावधान रखा गया था। सब जगह चौकसी थी,  लेकिन गुरुवार को दोपहर फिर से एक आतंकी हमले से यही जाहिर हुआ है कि राज्य में फिलहाल आतंकवादियों को कम करके आंकना भूल होगी। इससे भी बड़ी और भयानक बात  यह है कि हमले के लिए जिस नाबालिग लड़के का इस्तेमाल किया गया उसने सिर्फ 50 हजार रुपए के लिए बस पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस नाबालिग आरोपी को हमले के  लिए हिजबुल मुजाहिदीन के हैंडलर ने 50 हजार रुपए दिए थे। स्थानीय पुलिस के अनुसार इस हमले को अंजाम देने के लिए हिजबुल के आतंकी को कहा गया था, लेकिन उसने बस  स्टैंड के पास हमला करने से साफ इंकार कर दिया। जम्मू में बस स्टैंड पर हुए बम धमाके में दो व्य€क्ति की जान चली गई और लगभग दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। सुरक्षा बलों की चौकसी के बावजूद यह हमला बताता है  कि आतंकवादियों ने पूरे इलाके में अपना जाल बिछाया हुआ है और वे ऐसे बम विस्फोटों से अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करते रहते हैं।
बम विस्फोट के बाद जम्मू क्षेत्र के पुलिस निदेशक ने कहा कि घटना की प्रकृति को देखते हुए साफ है कि इसे सांप्रदायिक सौहार्द और शांति की स्थिती को बिगाड़ने की मंशा से अंजाम दिया गया, लेकिन जब आम लोग इस मंशा को समझने लगते हैं, तो ऐसे हमलों का मकसद अपने आप नाकाम हो जाता है। इसके बावजूद यह सच है कि आतंकवादियों की  हरकतों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। यह समझना मुश्किल है कि एक ओर जम्मू-कश्मीर में आतंक का माहौल बनाए रखने के लिए इस स्तर की  हिंसा भी जारी रखी जा रही है और दूसरी ओर उनका समर्थन करने वाले अलगाववादी संगठन शांति से सारे सवाल सुलझ जाने की उ्मीद भी पालते हैं।
विडंबना है कि भारत सरकार जहां राज्य में शांति बहाली के लिए बातचीत से लेकर सुरक्षा तक के सभी मोर्चों पर चौकसी बरतने के इंतजाम में लगी है, वहीं आतंकी संगठन माहौल  बिगाड़ कर समस्या को और ज्यादा जटिल बनाने की जुगत में लगे हैं। सवाल है कि बम हमलों में आम लोगों या फिर सुरक्षा बलों की जान ले लेने से किस तरह की समस्या का  समाधान होगा? ऐसे आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले संगठन €या यह समझ पाने में सक्षम नहीं हैं कि सरकार उन्हें रोकने के लिए सख्त कार्रवाई कर सकती है इस तरह का  माहौल बने रहने से किसे लाभ हो रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने मसूद अजहर के भाई सहक्ति कई आतंकियों को गिरफ्तार कर आतंक का सामना करने के मामले में एक  सकारात्मक संदेश दिया था, लेकिन अब जम्मू में फिर बम हमले की घटना से यही लगता है कि पाकिस्तान के ठिकाने से भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियां संचालक्ति करने  वालों पर पूरी तरह काबू पाना अभी बाकी है।
दरअसल, पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की, तब से पाकिस्तान की ओर से किसी कार्रवाई की आशंका बनी हुई थी, लेकिन  भारत के रुख को देखते हुए शायद फिर से आतंकियों के जरिए परोक्ष रूप से संदेश देने की कोशिश की गई है। आतंकी संगठनों को यह अंदाजा है कि ऐसे छोटे-छोटे हमले भी   नागरिकों में खौफ बनाए रख सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रखने कीजरूरत है कि भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों ने कई कामयाब कार्रवाई करके आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब  दिया है। अब अगर आतंकियों और उनका समर्थन करने वाले अलगाववादी समूहों को यह समझना जरूरी नहीं लगता है कि उनकी गतिविधियों से कैसे हालात पैदा होंगे, तो देश के  सुरक्षा बलों के सामने आतंकियों का सामना करने या उन्हें उचक्ति जवाब देने के सिवा और €या रास्ता बचेगा? जम्मू बस स्टैंड पर ग्रेनेड से हमला और उसमें एक नाबालिग का  इस्तेमाल यह संकेत देता है कि इस तरह की आतंकी घटनाओं से निपट पाना आसान नहीं होगा। जिस नाबालिग आरोपी ने ग्रेनेड फेंका है वह कक्षा नौवी का छात्र बताया जाता है।  इसका पिता पेंटर का काम करता है। तीन भाई-बहनों में यह आरोपी सबसे छोटा है, लेकिन वह 50 हजार रुपए के लिए हाथ में ग्रेनेड पकड़ने के लिए तैयार हो गया। इससे साबित  होता है कि आतंकी संगठन गरीब और जरूरतमंद, बेरोजगार लोगों को हथियार बनाकर आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं। इससे साफ होता है कि आतंकी संगठन  पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ कराने में असफल होने के बाद अब जम्मू-कश्मीर के गरीब बच्चों को मोहरा बना रहे हैं। इस तरह की घटनाएं चिंता और सचेत करने वाली हैं। सुरक्षा  और जांच एजेंसियों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती है। जम्मू पुलिस की मानें तो आतंकवादी संगठन हिंदू और मुस्लिम में तनाव पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। कश्मीर में ग्रेनेड  और बम फोड़ने वाले आतंकी संगठन जम्मू में नाबालिग बच्चों और बेरोजगार युवकों को इस्तेमाल करने लगे, तो स्थिती खतरनाक हो सकती है। यहां लोगों को भी सचेत और सतर्क रहने की जरूरत है।

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