जल्दबाजी में बना विमान बन रहा है ताबूत?

नई दिल्ली
पांच महीने से भी कम समय में दो-दो बोइंग 737 मैक्स विमानों का क्रैश हो जाना महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। एक विदेशी अखबार की मानें तो इसकी तह में दुनिया की दो दिग्गज विमान निर्माता कंपनियों बोइंग और एयरबस के बीच भारी कांपिटिशन है, क्योंकि बोइंग 737 मैक्स का डिवेलपमेंट प्रतिस्पर्धा के दबाव में बेहद जल्दबाजी में किया गया था।  न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 में बोइंग को उस वक्त भारी झटके का सामना करना पड़ा, जब उसका सबसे बड़ा ग्राहक अमेरिकन एयरलाइंस उसके प्रतिद्वंद्वी  एयरबस को सैकड़ों नए फ्यूल एफिशिएंट विमानों का ऑर्डर देने की तैयारी कर रहा था। उस वक्त अमेरिकन एयरलाइंस के चीफ एग्जिक्युटिव गेरार्ड आर्पे ने बोइंग के वरिष्ठ  अधिकारी डब्ल्यू जेम्स मैकनेर्ने को डील क्लोज करने की बात कहने के लिए बुलाया था। गेरार्ड ने जेम्स से कहा था कि अगर बोइंग कारोबार करना चाहता है, तो उसे आक्रामक  होकर आगे कदम बढ़ाना होगा। ऑर्डर के लिए हालांकि अमेरिकन एयरलाइंस को बोइंग ने राजी कर लिया, लेकिन उसने एक नए पैसेंजर प्लेन को विकसित करने का आइडिया त्याग  दिया। इस नए विमान के विकास में उसे एक दशक का वक्त लगता। इसके बदले उसने अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले विमान 737 को ही अपडेट करने का फैसला किया। इसके  लगभग छह महीने बाद ही 737 मैक्स का अस्तित्व सामने आया। बता दें कि इथियोपियन एयरलाइंस का एक विमान इसी महीने उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इससे  पहले पिछले साल अक्टूबर में इंडोनेशिया के लायन एयर का एक विमान भी उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इन दोनों दुर्घटनाओं में 346 लोगों की मौत हुई थी। इन दोनों   दुर्घटनाओं में बोइंग का 737 मैक्स 8 विमान शामिल था।

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