यह राजनीति नहीं स्वार्थांधता

सपा नेता राम गोपाल यादव कुछ भी बोल जाने के लिए जाने जाते है। अपने अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए जो व्यक्ति या दल चुनाव लड़ रहा हो, वह एड़ी चोटी का जोर  लगाता ही है, परंतु वह मतिमंदों की तरह अनाप-शनाप कुछ भी बोलने लगे तो यह निंदनीय और मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा ही कहलाती है। राम गोपाल सपा रूपी डूबती  नाव, जिसका नेतृत्व उनके भातीजे अखिलेश कर रहे हैं को बचाने के लिए इस कद्र बावले हो जाएंगे कि वे पुलवामा में हमारे जवानों की हत्या को साजिश करार देंगे, यह हमारी  राजनीति के उस ओछे स्वरूप का परिचायक है, जिसमें चुनाव जीतना ही सब कुछ हो जाता है। उसके सामने देश प्रेम, देश की एकता, अखंडता, जवानों की शहादत, सार्वजनिक  जीवन की शुचिता सब गौड़ हो जाती है। ऐसे नेता और दल जातिवाद, धर्मवाद और संप्रदायवाद से खुलकर खेलते हैं। कारण वे राजनीति में जनसेवा और देशसेवा के लिए नहीं आए है  उनके लिए स्वयं और स्वपरिवार की सेवा ही सबसे बड़ी राजनीति है। सपा ने अपने जन्म से लकेर आज तक वही किया है। अपने परिवार का येन केन प्रकारेण भला। अब जबकि  उत्तर प्रदेश ने लंबे अरसे बाद सही शासन देखा है, मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, बिजली, सिंचाई को इनकी सरकार ने लक्जरी बना दिया था, आज सहज सुलभ है और इनके पांव के  नीचे से जमीन का खिसकना जारी है। अब सब कुछ करने के बाद बचकानी और विवेक शून्य आरोप कर रहे है। 135 करोड़ के लगभग आबादी वाले इस देश में सिर्फ सपा के आजम  और गोपाल जैसे नेताओं के बयान ही पुलवामा जैसे पाक प्रायोजित हत्या कांड पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहे हैं। यह इस बात को तसदीक कर रही है कि सपा की तरह ही हर  नकारात्मकवाद की राजनीति करने वाली बसपा से गंठजोड़ भी उन्हें चुनावी वैतरणी पार कराता नहीं दिख रहा और गंठजोड़ के बाद भी सपा को अपना अस्तित्व बचता नहीं दिख रहा  है, तो फिर ऐसे आत्मघाती बयान देने का सिलसिला शुरू किया है, परंतु ऐसी जड़ शिखाविहीन बयानों से मत मिलने का जमाना अब लद गया है। अब जनता सियार के खाल में  छिपे भेड़ियों को पहचानती है और अच्छी तरह जानती है कि उसका हित किसके साथ जाने में है। जनता का हर वर्ग और जाति विकास चाहती है। जब अपने लगभग ढाई दशक के  कार्यकाल में इन्होंने जनता के लिए कुछ नहीं किया, सिर्फ अपने को, अपने चाटुकारों को मोटा किया और जो बदलाव एक दशक में नहीं हुए आज जनता हर गांव, हर शहर में देख रही है, तो फिर उसी जाति,धर्म और झूठ पर बरगलाने का प्रयास कितना सही होगा। इसको सपा और बसपा दोनों को समझना होगा। ऐसे वाहियात बयान और मिट्टी ही पलीत करेंगे। राजनीति करो पर विकास के मुद्दे पर, लोग भी यही चाहते है। इसलिए समाज के हर वर्ग ने सपा बसपा को खारिज कर भाजपा को दो तिहाई बहुमत से केंद्र और दिल्ली में ताज सौंपा। आप उससे मुद्दों पर चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं। अपने चिर शत्रु से गले मिलकर भी भयाक्रांत हो और कुछ नहीं मिला, तो अब देश के दुश्मन पाक का हौसला अफजाई हों, ऐसे  बयान देकर और हमारे साथ खड़ी दुनिया को गलत संदेश देकर सपा कौन सी देश सेवा कर रही है। आखिर वह क्या चाहती है कि यह प्राकारांतर से आतंकियों और अलगाववादियों  और उसके पाकिस्तान की वकालत है, जो हर हाल में बंद होनी चाहिए। सपा के गोपाल, आजम जैसे नेताओं को देश नहीं बख्शेगा। इनकी स्वार्थांधता की राजनीति इन्हें कहीं का नहीं  छोड़ेगी। कम से कम देश की लड़ाई और शहीदों के त्याग और उनके शौर्य पर तो राजनीति न करें।

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