दिमाग की बत्ती गुल न हो

आज प्रतिस्पर्धा एवं चुनौतियां बढ़ गई हैं। ऐसी स्थिति में दिमाग तेज रहने पर ही हम वांछित सफलता पा सकते हैं। हमारे खानपान एवं जीवन शैली में अनेक ऐसी चीजें शामिल हो  चुकी हैं, जो असमय एवं अकारण हमारे दिमाग की बत्ती गुल कर देती हैं। मस्तिष्क की क्षमता का सभी कार्य में महत्व होता है। हमारा दैनंदिन कार्य इसी पर निर्भर है।
सबकी दिमागी क्षमता अलग-अलग होती है। हमारे दिमाग में सूचनाओं, ज्ञान एवं अनुभव आदि का दो तरह से संचय होता है। इन्हें अल्पावधि याददाश्त एवं दीर्घावधि याददाश्त के रूप  में जाना जाता है। किसी व्यक्ति की दीर्घावधि याददाश्त अच्छी और अल्पावधि की याददाश्त कमजोर हो सकती है। यह क्षमता भी सबमें अलग-अलग हो सकती है। विद्यार्थी परीक्षा  के समय जो पढ़ने एवं याद करते हैं, वह दिमाग में अल्पावधि याददाश्त के रूप में संग्रहित होता है, इसीलिए वे परीक्षा के समय एवं कुछ दिनों के बाद उसे भूल सा जाते हैं। इसमें  से बहुत कम बातों का दीर्घावधि स्मरण शक्ति के रूप में संग्रहण होता है।
दिल की भांति हमारा दिमाग भी सदैव काम करता रहता है। सोते जागते इसमें कुछ न कुछ होते रहता है। हम खामोश होते हैं, तब भी हमारा दिमाग दौड़ते रहता है। आकाशीय  बिजली की तरह दिमाग में कोई न कोई विचार कौंधते (चमकते) रहता है। दिमाग को पूर्ण रूप से जानने एवं बूझने वैज्ञानिक चिकित्सक सभी सतत् कार्य कर रहे हैं।

आयोडीन की कमी - आयोडीन की कमी बच्चों के बौद्धिक स्तर को कम करती है। यदि गर्भावस्था के दौरान माता को सही मात्र में आयोडीन न मिले तो इसका प्रभाव होने वाले बच्चे  के मानसिक विकास पर पड़ता है। आयोडीन का स्तर कम होने से बच्चे की जनरल इंटेलिजेंस कम जो जाती है। इसकी कमी का प्रभाव बौद्धिक क्षमता के अलावा स्वास्थ्य पर भी  पड़ता है। यह समुद्री नमक, सिंघाड़ा, कमल नाल, मूली, शतावर गाजर, टमाटर, पालक, आलू, मटर, मशरूम, सलाद, प्याज, केला, स्ट्राबेरी, दूध, पनीर एवं समुद्री जीवों आदि में
मिलता है।

रसायन एवं कीटनाशक - खेतों में उत्पादन बढ़ाने के लिए रसायनों तथा कीड़ों को मारने के लिए कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। इसकी अधिकता विकसित हो रहे मस्तिष्क  की क्षमता को प्रभावित करती है। गर्भावस्था के समय माता के खानपान में किसी भी तरह से इनका स्तर बढ़ता है, तो यह गर्भस्थ शिशु के दिमागी विकास को प्रभावित करता है।  बच्चे की वृद्धि पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे बच्चे कम बुद्धिमान होते हैं, अतएव प्राकृतिक विधि से प्राप्त फलफूल खाएं।

मां बाप एवं बड़ों की डांट - बचपन में बात-बात पर डांटने अथवा फटकारने से बच्चे दिमागी रूप से बीमार होकर बौद्धिक कमजोर हो जाते हैं। ऐसे बच्चे तनाव एवं अवसाद से घिर  जाते हैं। यह भी दिमागी क्षमता को कम करता है। बच्चों को दिमागी स्वस्थ रखने उन्हें प्रेमपूर्वक समझाएं किंतु कदापि डांटें फटकारें नहीं।

फैटी फूड - उच्च मात्र में वसायुक्त भोजन दिमाग को क्षति पहुंचाता है। केक, बिस्किट, बर्गर आदि में पाया जाने वाला फैट छात्रों को पढ़ाई में कमजोर कर देता है। फैटी फूड अधिक  खाने से छात्रों का परीक्षा परिणाम बिगड़ सकता है। हर हाल में फैटी फूड की अधिकता से बचें।

मदिरापान - जाम के शौकीनों की दिमागी क्षमता कम हो सकती है। अधिक मदिरापान से दिमाग की सक्रिय कोशिकाएं मर जाती हैं, जिससे मनुष्य की याददाश्त खत्म हो जाती है।  इससे लंबे समय तक याद रखने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे बचने के लिए मदिरापान बंद कर दें।

धूम्रपान - धूम्रपान अधिक करने से याददाश्त कम होती है। व्यक्ति मंदबुद्धि हो जाता है। इससे संज्ञानात्मक बोध संबंधी कार्य प्रभावित होने लगता है। धूम्रपानी दैनिक याददाश्त का  एक तिहाई भाग खो देते हैं। इनकी मस्तिष्क कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं। इससे बचने हेतु धूम्रपान बंद कर दें।

जंकफूड - बच्चों के आईक्यू को जंकफूड कम करता है। इसे बच्चे चाव के साथ खाते हैं किंतु इससे उनकी बौद्धिक क्षमता कुंद (भोथरी) हो जाती है। जंक फूड अर्थात परिष्कृत  खानपान में वसा, शर्करा, ऊर्जा एवं रसायनों की मात्र अधिक होती है। इसका अधिक सेवन आई क्यू को कम करता है। इनकी मस्तिष्क क्षमता में कमी आ जाती है, अतएव जंकफूड  के स्थान पर पौष्टिक आहार लें।

मिठाई और टॉफी - आज सर्वप्रिय बन चुकी मिठाई और टॉफी दिमाग के लिए खतरनाक हैं। मुंह में पानी लाने वाली मिठाई एवं टॉफी कमर का घेरा एवं वजन बढ़ाते हैं। साथ ही  दिमाग को कमजोर कर देते हैं। इससे स्मरण शक्ति में कमी आ जाती है। इस स्थिति से बचना है, तो मिठाई एवं टॉफी से बचें।

प्रदूषण - धूल, धुआं, गंध आदि के प्रदूषण से दिमाग को नुकसान होता है। यह व्यक्ति को तनाव एवं अवसाद में लाता है, जो दिमागी क्षमता को नुकसान पहुंचाते एवं कम करते हैं।  इससे सीखने की क्षमता और याददाश्त कम हो जाती है। प्रदूषण से दिमाग में कई तरह के खतरनाक बदलाव होते हैं। इसका फेफड़ों एवं दिल पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। दिमाग को  सही रखने के लिए सभी तरह के प्रदूषण से बचें। साफ हवा में गहरी सांस लें।

मोबाइल, कंप्यूटर एवं टीवी - तीनों आधुनिक संचार एवं मनोरंजन माध्यमों टीवी, कंप्यूटर एवं मोबाइल का अधिक उपयोग दिमाग को कमजोर करता है। ये अनावश्यक तनाव में लाते  हैं। एवं अपनी उपयोगिता के चलते सबको गुलाम व मूर्ख बनाते हैं। कंप्यूटर की बढ़ती मेमोरी आदमी की मेमोरी को खाली कर रही है। कंप्यूटर का ज्ञान भंडार व्यक्ति के ज्ञान भंडार  को निगल रहा है। इन पर आश्रित रहना या इनका गुलाम बनना छोड़िए। टेलीफोन, मोबाइल से लंबी बातें एवं टीवी, कंप्यूटर की दुनियां में डूबने से बचिए।

मानसिक दबाव - चिंता, तनाव, अवसाद, क्रोध आदि जैसे मानसिक दबाव दिमाग एवं स्मरण शक्ति को कम करते हैं। इनसे उबरिए, हंसिए व हंसाइए।

विश्राम एवं नींद - किसी भी चीज में अधिक डूबने से दिमाग कमजोर हो जाता है। काम एवं पढ़ाई की अधिकता या उसे बोझ मानने से दिमागी निर्बलता आती है। अतएव विश्राम भी  कीजिए। भरपूर नींद लीजिए।

- नीलिमा द्विवेदी

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