एकदम सही कदम

भारत का आतंकवाद-अलगाववाद को लेकर बदला तेवर पाक की हठधर्मिता और उसके द्वारा लादे जा रहे छुपे युद्ध और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद तथा अलगाववाद का एकदम  सही, सामयिक और सटीक जबाब है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां कैसे हैवानों से दो-दो हाथ कर रही हैं, इसका नमूना शुक्रवार को उस मुठभेड़ में देखने को आया, जब एक मासूम को  पहले तो आतंकियों ने ढाल बनाया और बाद में उसे मौत के घाट उतार दिया। उसके मां-बाप मिन्नतें करते रहे, परंतु उसका कोई असर इन नराधमों पर नहीं पड़ा, तो हमारी सरकार  का इनके साथ कोई दया माया न दिखाने का निष्कर्ष और संकल्प पूर्णत: सही है। अब आगे बढ़कर इन्हें मारने के सिवाय कोई चारा नहीं है। अब आतंकवाद का पूरा खात्मा होना  चाहिए और उसकी सहायता में बाहर का यदि कोई फिर हरकत करता है, तो उसका अंजाम Žबालाकोट से भी भयावह और निर्णायक होना चाहिए। हम कैसे शत्रु को झेल रहे हैं, इसे  दुनिया जानती है, इसलिए अब इस मुद्दे पर सुरक्षात्मक से आक्रामक होने का हमारा निर्णय सही है और यह हमारा हक भी है। जब इजरायल और अमेरिका अपने ऐसे दुश्मनों को  सात समुद्र पार जाकर मार सकते हैं, तो हम €यों नहीं। यह तर्क अब अमेरिका सहित पूरी दुनिया मान रही है कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित निर्दोषों की हत्याओं का सिलसिला,  दुनिया के स्वर्ग को उपद्रवग्रस्त बनाए रखने का सिलसिला रुकना चाहिए और हमने भी आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक से, घाटी में सक्रिय आतंकियों को समाप्त करने के  लिए ऑपरेशन ऑल आउट से, और पाक परस्त अलगाववादियों की मुश्कें बांध कर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब उनके लिए हमारे दिल में कोई जगह नहीं, कोई दया माया नहीं।  देश की खाओ और पाकिस्तान की गाओ, यह अब इस देश में नहीं चलेगा। अब रिश्वत नहीं डंडा मिलेगा।
हमने बहुत सहा। 35 साल थोड़ा समय नहीं होता, पाक ने हमारे सब्र को हमारी समझाईश को और हमारी कमजोरी समझा। यह उसकी भूल थी। दो ही सर्जिकल स्ट्राइक ने उसकी  घिग्घी बंद कर रही है अब उसे अपने आतंक के इस खेल पर लगाम लगानी ही होगी, नहीं तो उसने गुरुवार को अमेरिका की हिदायत सुनी होगी और शुक्रवार को हमारे वित्तमंत्री की  आवाज भी सूनी ही होगी, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि अब आतंक पर भारत 'बैक फूट’ पर नहीं खेलेगा। इसका €या अर्थ होता है, पाक को समझाने की जरूरत नहीं है। समझे तो  अच्छा नहीं, तो अब कोई हिमाकत उसे बहुत अच्छी तरह समझा देगी, यह तय है। यही बात हमारे अलगवावादी नेताओं और संगठनों पर भी लागू होती है, अब भारत की खाकर  उसकी एकता-अखंडता पर सवाल खड़ा करने वालों और पाक से पैसा खाकर उसकी चाटुकारिता करने वालों की खैर नहीं। ऐसे लोगों और संगठनों पर पाबंदी और सख्ती सतत जारी है  और वह तब तक जारी रहनी चाहिए। जब तक ये अपनी काले अतीत से तौबा नहीं कर लेते और वर्तमान में ऐसा कुछ न करने का पुख्ता विश्वास जगाते हैं। कारण इन्हें राह पर  आने की बहुत मोहलत दी गई, बहुत सहूलियतें भी अतीत में दी जाने की बातें समाने आ रही हैं। इसके बाद भी इन्हें यदि पाक प्रिय लगता है, तो वहां जाएं आज की सरकार की  नीति और नियति साफ है। देश भ€त को कोई समस्या नहीं, परंतु पाकिस्तान का झंडा बुलंद करने की हिम्मत दिखाने वालों, हमारे जवानों पर पत्थर मारने वालों, उसकी चाटुकारिता  और परस्ती करने वालों के लिए हमारे यहां सिर्फ एक ही जगह है, वह है जेल। इसलिए या तो सही राह पर आओ या मिटने को तैयार हो जाओ। यही शैली सबसे मुफीद और सही है।

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