महाआघाडी का मसला हुआ हल

मुंबई
आखिरकार महाआघाडी के घटक दल कांग्रेस और राकांपा में फंसा सीटों का पेंच हल हो गया है। राज्य की कुल 48 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस 24 सीटों पर जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस  20 जगह पर चुनाव लड़ेगी। दोनों दल अपने सहयोगियों के लिए 4 जगह छोड़ेंगे। इन दलों में स्वाभिमान शेतकरी संगठन, बहुजन विकास आघाडी और युवा स्वाभिमान पार्टी शामिल  है। शनिवार को महाआघाडी की तरफ से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया गया है कि महाआघाडी में पार्टियों और संगठनों की कुल संब्या 56 है और सभी संयुक्तप्रगतिशील महागठबंधन के बैनर तले सत्ताधारी दलों का मुकाबला करेंगे। महाआघाडी में स्वाभिमान शेतकरी संगठन को चार में से दो जगह दी गई है। राकांपा ने अपने कोटे से स्वाभिमान  शेतकरी संगठन के लिए एक सीट हातलकंणले छोड़ी थी, दूसरी जगह कौन सी है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। चर्चा है कि सांगली या अकोला में से कोई एक जगह स्वाभिमान  शेतकरी संगठन को मिल सकती है। बहुजन विकास आघाडी के लिए पालघर सीट छोड़ी गई है, जबकि युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए अमरावती सीट छोड़ी गई है। यहां से निर्दलीय  विधायक रवि राणा की पत्नी चुनाव मैदान में उतरेंगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए शाम, दाम, दंड व भेद का इस्तेमाल कर रही है। उसका मुकाबला करने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दल  एकजुट हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए का हिस्सा रहे स्वाभिमान शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए हमने महागठबंधन का  हिस्सा बनना स्वीकार किया है। खास बात यह रही कि इस प्रेस काफ्रेंस में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल गैर हाजिर रहे।

जो हमारे साथ नहीं, वह भाजपा की बी-टीम : अजित पवार

राकांपा नेता अजित पवार ने कहा कि जो महागठबंधन के साथ नहीं है, वह भाजपा की बी टीम है। एक तरह से उनका इशारा प्रकाश आंबेडकर की तरफ था। उन्होंने कहा कि सभी  को साथ लेने के लिए हम मित्र दलों को ज्यादा सीटे देने को तैयार थे। हम उन्हें (बहुजन वंचित आघाडी) को 6 सीट दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जो महागठबंधन के साथ नहीं है, वह भाजपा की बी-टीम है। वह भाजपा-शिवसेना को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव मैदान में हैं। अजित पवार ने कहा कि पांच साल तक सत्ता रहने के बावजूद भाजपा को उम्मीदवार  नहीं मिल रहे हैं इस लिए कांग्रेस-राकांपा की विचारधारा वाले लोगों को टिकट देनी पड़ रही है।
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