पौष्टिक फल है पपीता

पपीता एक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक फल है। भारत में पपीता खूब पाया जाता है परंतु पपीते का मूल स्थान मैक्सिको तथा कोस्टा रीका को माना जाता है, जहां से यह भारत  पहुंचा। पपीते के पौधे का जीवनकाल 15-20 वर्ष तक होता है।
पपीते में 'पपेन’ नामक एंजाइम पाया जाता है, जो दवाएं बनाने में प्रयोग होता है। पपीता मीठा, शीघ्र पचने वाला फल माना जाता हैं। पपीता विटामिन 'ए’ तथा विटामिन 'सी’ का  बेहतरीन स्रोत है।
पपीता जिगर एवं तिल्ली के रोगों में रामबाण औषधि है। कच्चे पपीते की सब्जी भी बनाई जाती है। पपीते के पके हुए फल में लगभग 88.6 प्रतिशत जल, 0.5 प्रतिशत प्रोटीन, 9.5  प्रतिशत कार्बोहाइड्रेटस, 0.5 प्रतिशत कैल्शियम और 0.9 प्रतिशत मिनरल होते हैं। पपीते में 'कैरोटिन’ पाया जाता है, जो हमारे शरीर में विटामिन 'ए’ और विटामिन 'डी’ की कमी को  पूरा करता है। विटामिन 'ए’ की कमी से 'रतौंधी’ रोग हो जाता है, अत: पपीता अंधेपन को रोकने में सहायक है। पपीते में अनेक औषधीय गुण हैं। पपीते को छीलकर प्रतिदिन भोजन  के बाद खाने से जिगर एवं तिल्ली रोगों से छुटकारा मिलता है।
पपीता शरीर की पाचन शक्ति बढ़ाकर खून में वृद्धि करता है। पपीता कब्ज में भी लाभदायक है। दस्त तथा खूनी बवासीर में पपीता काफी आराम देता है। पेट के रोगों में पपीता  अचूक औषधि है। जिन महिलाओं के स्तन ढीले हों और दूध न आता हो, उन महिलाओं को पपीते का सेवन करना चाहिए। इससे दूध आसानी से उतर आता है तथा स्तन स्वस्थ  बनते हैं। पपीता महिलाओं के शरीर को मजबूती देता है।
पके पपीते की तरह कच्चा पपीता भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। कच्चे पपीते को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके सिरके में डाल दें। पांच दिन बाद प्रतिदिन भोजन के  बाद एक-दो टुकड़े सेवन करने से कुछ ही दिनों में जिगर एवं तिल्ली संबंधी खामियां दूर हो जाएंगी।
कच्चे पपीते के टुकड़े दाद पर मलने से राहत मिलती है। कच्चे पपीते का सेवन स्त्रियों के मासिक स्राव की कमी को दूर करता है। कच्चे पपीते का छिलका छिलने के बाद उसके गूदे  से निकले रस का सेवन भूख बढ़ाता है तथा अजीर्ण दूर करता है। पपीते का नियमित सेवन शरीर को मजबूत बनाता है।

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