घातक है नफरत की संस्कृती

रेडियो पर समाचार सुनते हुए मुझे न्यूजीलैंड में हुए नरसंहार के बारे में पता चला। संवाददाता स्थानीय मुस्लिमों से उनकी प्रतिक्रिया ले रहे थे और साफ तौर पर वे आवाजें दक्षिण  एशियाई थीं। शनिवार सुबह एक समाचारपत्र की रिपोर्ट में बताया गया था कि हमले के बाद लापता हुए लोगों में अहमदाबाद और हैदराबाद के नौ भारतीय शामिल हैं। गोलीबारी की  रिपोर्ट के बाद की कमेंट्री (जो बीबीसी के रेडियो-4 की थी, जिसे मैं हर सुबह सुनता हूं) एक दूसरी कहानी में बदल गयी। ऑस्ट्रेलिया के पहले पियानों को खोज निकाला गया था और  उसे मरम्मत के लिए इंग्लैंड भेजा गया था। यहां प्रश्न है कि इंग्लैंड ही €क्यों? €क्योंकि वहीं इसे बनाया गया था।
वर्ष 1788 की जनवरी में 11 जहाजों के साथ यह ऑस्ट्रेलिया आया, जिसे पहले बेड़े के रूप में जाना जाता है। ये सभी इंग्लैंड के पोर्ट्समाउथ के मूल जहाज थे, जो अपने औपनिवेश  की शुरुआत करते हुए एक हजार से अधिक यूरोपीय लोगों को ऑस्ट्रेलिया ले आये थे। यह बहुत पहले की बात नहीं है, मराठों और अफगानों के बीच पानीपत की अंतिम लड़ाई के  बाद की बात है, मुगल शासन के पतन के काफी बाद की। ब्रिटिशर्स पहली बार 1608 में सूरत आये थे और इसलिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड औपनिवेशिक प्रक्रिया में नए हैं।  न्यूजीलैंड में आप्रवासन और विदेशियों को लेकर हमलावार के जो विचार हैं, वे गौरतलब हैं। नरसंहार से पहले लिखे नोट में वह कहता है कि लोगों की हत्या करने के पीछे उसका मकसद, 'यूरोप की भूमि से आप्रवासन की दर को प्रत्यक्ष तौर पर कम करना है’। वह न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया (जहां उसका जन्म हुआ था) को यूरोप मानता है, जबकि यूरोप के  लोग यहां खुद ही आप्रवासी हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के औपनिवेशवाद ने यहां के मूल निवासियों, जिन्हें आदिवासी कहा जाता है (आमतौर पर भारतीयों और उनका जीन एक  जैसा है) पर काफी अत्याचार किये हैं। आदिवासी होने का मतलब है, जो काफी पहले से रह रहे हैं, जैसे हम भारत के सबसे प्राचीन निवासियों को आदि-वासी कहते हैं। यूरोपीय  औपनिवेशकों ने आदिवासी आबादी को बर्बाद कर दिया था। इन लोगों ने आदिवासियों की जमीन पर कŽजा करने के लिए क्रूरता का सहारा लिया था और अपने साथ यहां बीमारी  लेकर भी आये थी। कŽजे के बाद जगहों का बाकायदा नामकरण किया गया। वि€टोरिया, न्यू साउथ वेल्स, वेलिंगटन, ऑकलैंड, €वींसलैंड वे नाम हैं, जिनसे हम आज परिचित हैं। ये वे  नाम हैं, जिन्हें औपनिवेशकों ने आदिवासियों की इच्छा के विरुद्ध कब्जाई गयी जमीनों पर थोप दिया। न्यूजीलैंड को ब्रिटिशर्स ने स्थानीय माओरी आबादी से हड़प लिया था। जमीन  हड़पने के बाद भी यूरोपीय लोगों ने आदिवासियों पर बहुत अत्याचार किये। अपने संसद के अधिनियम के तहत उन्होंने आदिवासियों के बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करना शुरू किया। आज इन्हें स्टोलन जेनरेशन के नाम से जाना जाता है। यह नीति 1960 के दशक तक जारी रही। यहां तक कि आज भी यहां आदिवासियों को भेदभाव का सामना करना  पड़ता है, जिसमें आपराधिक न्यायिक प्रणाली भी शामिल है। यह सब कथित तौर पर ऑस्ट्रेलियाई भावना दर्शानेवाले उनके हंसमुख और उत्साही आचरण के नीचे छुप जाता है (बेशक,  इन दिनों हम ऑस्टेलियाई भावना को उनके छल के माध्यम से भी जानने लगे हैं)। ऊपर जो कुछ मैंने लिखा है, वह सामान्य जानकारी है और हर ऑस्ट्रेलियन और न्यूजीलैंडर को  यह सब मालूम है। यूरोपीय औपनिवेशवाद ने दुनिया के दूसरे हिस्सों को भी बर्बाद किया है।

- आकार पटेल

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