चीन का आतंकी खेल

एक बार फिर चीन ही मसूद को बचाने के लिए आगे आया और तकनीकी आधार पर अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर उसने वीटो लगा दिया। जिससे हमें निराश होना स्वाभाविक  है, परंतु जिस तरह चीन का पाक में निवेश है, हमें लेकर जो उसका अब तक मुंह में राम बगल में छुरी वाला रवैया रहा है, जो कुछ उसने किया, उसमें आश्चर्य करने जैसा कुछ  नहीं है। चीन जो खुद दुनिया का चौधरी बनने का पुरातन महत्वाकांक्षी है, वह हर जगह हमें अपने सामने रोड़ा की तरह पाता है, उसने हमारे यहां घुसपैठ करके, धमका के, सब कुछ  करके देख लिया, वह एक बार 62 में हमारे ऊपर हमला कर चुका है। उसके बाद हमारी शक्ति में जो इजाफा हुआ, उसका भी उसे एहसास है, इसलिए पाक की आड़ में खेल करना  और हमें उलझाए रखना उसे ज्यादा मुफीद लगता है। ऐसा करते हुए व्यापार और अन्य कारणों से वह हमें भी दुखाना नहीं चाहता, इसलिए रोड़े अटकाने में ही संतुष्ट रहता है। उसका  हित भी सधता रहे और वह खुले भी न। यह उसकी दृष्टि से सही हो सकता है, परंतु आज वह मसूद को बचाकर और पाक को फौरी राहत दिलाकर भले ही हमें छकाने का आनंद ले  रहा है, परंतु ऐसा करके वह अपने आपको दुनिया के सामने आतंकवादियों के रक्षक के रूप में पेश कर रहा है। कारण आज पूरी दुनिया जानती है कि आतंक का म का कहां है और उसके संचालक और सरपरस्त कौन है? संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव हम नहीं लाए थे, फ्रांस आदि वे देश लाए थे, जो जानते हैं कि पाकिस्तान की धरती पर पुष्पितपल्लवित आतंकवाद पूरी दुनिया को हलाकान कर रहा है और उस समिति में मौजूद अधिकांश देश उसके भुक्तभोगी हैं। चीन जो दुनिया का चौधरी बनना चाहता है, वह खुलेआम तकनीकी कारण का हवाला देकर दुनिया में कुख्यात आतंकी को पाकिस्तान में निहित अपने स्वार्थों के लिए या हमारे द्वेष में बचाए, यह उसकी ही हालत खराब करेगा। इसका भान चीन को रखना चाहिए।
रही बात मसूद और पाकिस्तान के आतंक के कारखानों की, तो बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी। अब तो हमने भी वर्षों पुरानी सुरक्षात्मक नीति को तिलांजलि दे उनके घर में  घुसकर मारना शुरू कर दिया है। अमेरिका उसके घर में घुसकर कई बार मार चुका है। इरान मारने की धमकी दे रहा है। आखिर चीन पाक के आतंकियों को किस-किससे बचाएगा  और कब तक बचाएगा। चीन का बचाना भी उसके स्वाभिमान और संप्रभुता की चीरहरण को नहीं रोक पा रहा है। आखिर चीन किस-किस से लड़ेगा। कारण आतंकियों के कार्य का  कोई निश्चित क्षेत्र नहीं है। उनसे दुनिया का एक बड़ा वर्ग त्रस्त है और अब वह चुप बैठकर तमाशा देखने को तैयार नहीं है। वह जैसा को तैसा नहीं उसे कई गुना ज्यादा जवाब देने  को तैयार है व करके दिखा रहा है। संक्षेप में पाक के पाप का समर्थन कर चीन न तो उसका भला कर रहा है और न ही अपना कारण एक की छवि ही दुनिया में आतंक के म का  की बना गई है और दूसरा तेजी से आतंकियों के रक्षक के रूप में अपनी छवि बना रहा है। अब आतंक भारत और पाक का विषय न रह, पूरी दुनिया का मुद्दा बन गया है और चीन  को भी उसकी आलोचना करनी पड़ रही है। अब यह चीन को तय करना है कि पाकिस्तान की लाइन लेकर उसका साथ देकर उन्हें भी पाकिस्तान की तरह लांछित जीवन जीना है या  सही अर्थों में दुनिया का चौधरी बनना है चौधरी कोई अनायास ही नहीं बनाती। उसकी रीति-नीति, आचार- विचार, मूल्य और व्यवहार भी वैसा होना पड़ता है।
चीन जिस तरह से हर बात पर पाकिस्तान के साथ खड़ा होता है और उसकी पाप का अधिवक्ता बनता है यह चौधरी बनाने के लक्षण नहीं है। इसका परिणाम खतरनाक और घातक  होते है और ऐसे खेल के अंजाम भी भयावह होते हैं। चीन को भी उसकी लिए तैयार रहना चाहिए।

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