चीन और हम

चीन कितना भी मीठा-मीठा क्यों न बोले, उसकी हमारी विरोधी बीन बंद होने का नाम नहीं ले रही है। उसको पता चल गया है कि भारत उसकी गीदड़भभकी में नहीं आने वाला, तो  वह सामने से मीठा-मीठा बोल रहा है, परंतु भड़ास निकालने का कोई मौका वह नहीं छोड़ रहा है। अब और कुछ नहीं मिला, तो हजारों ऐसे नक्शे जला दिए, जिन पर अरूणाचल  प्रदेश को उसकी सही जगह यानि हमारे देश में दिखाया गया है। उसे इस पर भी एतराज है, जबकि वह अच्छी तरह जानता है कि वह हमारा अविभाज्य अंग है। कह देने या मान  लेने से किसी संप्रभु राष्ट्र का कोई हिस्सा किसी का नहीं हो सकता, परंतु चीन अपनी टांग अड़ाने की हरकत से बाज नहीं आ रहा है। जिस पर हमारी गिद्धदृष्टि जो डोकलाम के बाद से ही उस पर टिकी है, सतत टिकी रहनी चाहिए। भाई आपकी जमीन की भूख है, तो आप किसी की भी जमीन थोड़े हड़प लोगे। मौलाना मसूद अजहर जैसा आतंकी आज खुलेआम  घूम रहा है। वह भी चीन के रहमोकरम पर। कारण वह पाकिस्तान में निहित स्वार्थों में इतना अंधा है और हमारे द्वैष में इस कदर बावला है कि उसे पाक के हर पाप पुण्य लगते हैं  और हमारे खिलाफ की गई हर कार्रवाई भले ही कुछ न बोले फिर भी सही लगती है, परंतु इससे उसका घाटा ज्यादा हो रहा है। दुनिया में उसकी छवि एक ऐसे राष्ट्र की बन रही है,  जो अपने स्वार्थों के लिए आतंकी आकाओं को भी खुला छोड़े रहने का समर्थक है। अपनी करतूतों से वह अपने आपको दुनिया की नजर में पाक के बराबर खड़ा कर रहा है। डोकलाम में उसने देख लिया है कि आज का भारत और उसका नेतृत्व अतीत का भारत और नेतृत्व नहीं है। वह अपने देश की एकता-अखंडता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध, दृढ़ प्रतिज्ञ और सचेत है तथा सतत वैसी हर तैयारी कर रहा कि वह चाहे पाक हो या चीन या दोनों उनकी किसी भी हिमाकत और दुस्साहस का यथोचित जबाब दे सके। वैसे भी चीन को चौधराहट  की भाषा को लेकर देश में व्यापक जनाक्रोश है। आम आदमी को छोड़िए सभी व्यापारी संगठनों ने चीनी सामानों के बहिष्कार की बात स्वयं की है, चीन को इससे सचेत हो जाना  चाहिए और अपनी हमारे विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगानी चाहिए। उसके विदेश मंत्री अतीत में ड्रैगन और हाथी के साथ-साथ नृत्य करने की बात कर चुके हैं, परंतु चीन उस पर यथार्थ में चलता नहीं दिखाई देता। अब तक सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत के दर्जनों राउंड हो चुके हैं, परंतु उसके अड़ियल रुख के चलते बात नहीं बन पा रही है और उसे  अब अरूणाचल में भी अपने हद होनी का दिवास्वप्न आने लगा है, जबकि सच्चाई यह है कि वह आज भी हमारे भूभाग पर काबिज है और पाक द्वारा जबरदस्ती क जाए हमारे देश  के एक हिस्से पर भी उसकी ओर से आपत्तिजनक निर्माण किए जा रहे हैं। उसे ताइवान में ति बत में भी सीमा दिख रही है। इस तरह पूरी दुनिया और यहां तक कि समुद्र में सर्वत्र  उसे अपना ही जमीन दिखाई दे रहा है, परंतु इससे उसे कुछ हासिलहोगा, ऐसा नहीं लगता। कारण आज वह अपने कर्मों से हमें तो सतत् सतर्क कर रही रहा है। पूरी दुनिया को चौकन्ना कर रहा है और जिसकी ओर दुनिया के महत्वपूर्ण भाग के लोगों की संदेहास्पद दृष्टि हो, वह चैन से कैसे रह सकता है। चीन अपने कार्यों से दुनिया में शंका का बीजारोपण कर रहा है, तो उसका भला कैसे होगा? ऐसे में ड्रैगन और हाथी कैसे साथ नृत्य कर सकते हैं। टकराव अवश्यंभावी है। चीन ने डोकलाम में हाथी की चिंघाड़ सुनी है। यदि हाथी ने वैसी  दौड़ लगाई, तो फिर ड्रैगन का क्या होगा? इसका भान उसे रखना चाहिए और अपने हद में रहना चाहिए और निरर्थक विरोधी बीन बजाना बंद करनी चाहिए।

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