मन को शांत और प्रसन्न रखने में लाभकारी हैं ये योगासन

तेजी से दौड़ती जिंदगी के कारण अपनी सेहत का ख्याल रख पाना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में आप बिना जिम जाए सिर्फ योग करके ही खुद को फिट रख सकते हैं। योग  भारत की एक ऐसी प्राचीन पद्धति है, जो कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। नियमित योग करने से आप कई बीमारियों से से बचे रहते हैं। चलिए आज हम  आपको कुछ ऐसे आसन बताते हैं, जो आपको ताउम्र स्वस्थ रखने में मदद करेंगे।

प्राणायाम
प्राणायाम से मन को शांत रखने में भी मदद मिलती है। शरीर में मौजूद विषा€क्त तत्व दूर होते हैं। प्राणायाम यानी अपने अंदर की प्राण ऊर्जा को बढ़ाना। प्राण का अर्थ है शरीर के  अंदर नाभि, दिल और दिमाग आदि में स्थित वायु जो सभी अंगों को चलित रखती है। आयाम के तीन अर्थ है पहला दिशा और दूसरा योगानुसार नियंत्रण या रोकना, तीसरा- विस्तार  या लंबायमान होना। प्राणों को ठीक-ठीक गति और आयाम दें, यही प्राणायाम है।

कपालभाति
कपालभाति मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने के साथ-साथ यह आपकी पेट की चर्बी को भी कम करता है। इसके अलावा इससे आप कई गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते हैं। कपालभाति एक  ऐसी सांस की प्रक्रिया है, जो सिर तथा मस्तिष्क की क्रियाओं को नई जान प्रदान करती है। इसके लिए ध्यान की मुद्रा में बैठकर आंखें बंद करें और शरीर को ढीला छोड़ें। इसके बाद धीरे से सांस अंदर ले और उसके बाद बाहर छोड़ें। शुरुवात इसे 30 बार करें और धीरे धीरे इसे 100- 200 तक करें। 5-10 मिनट तक इस योग को करने से आपकी कई परेशानियां  दूर हो जाएगी।

अनुलोम विलोम
रोजाना अनुलोम विलोम करने से न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है। इस आसन को करने के लिए सबसे  पहले पद्मासन में बैठे। फिर दाई नाक को बंद करके बाई नाक से सांस लें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 मिनट तक दोहराएं। ऐसा करने से कुछ ही मिनटों में सिर का दर्द दूर हो जाएगा।

शीतली आसन
आपको ठंडा-ठंडा कूल-कूल रखने के अलावा भी शीतली प्रणायाम के ढेरों फायदे हैं। इसे करने से नींद अच्छी आती है और प्यास कम लगती है। साथ ही ये प्राणायाम Žब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल में रखता है। इसे करने के लिए पदमासन की अवस्था में बैठ जाएं। फिर अपनी जीभ को बाहर निकालकर एक नली यानी पाइप की तरह आकार दें और फिर सांस को धीरे-धीरे अंदर खींचकर पेट में भरकर मुंह बंद कर लें। इसके बाद जबड़े के अगले हिस्सो को छाती से सटा लें। कुछ देर सांस रोकें और फिर गर्दन को सीधा कर नाक से सांस बाहर  निकाल दें। याद रहें कि श्वास बाहर निकालने का समय श्वास लेने के समय से ज्यादा हो। इस क्रम को 10 से 50 बार तक कर सकते हैं।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget