दु:स्वप्नोंसे छुटकारा कैसे पाएं ?

हम सबको कभी कभी दु:स्वप्न आया करते हैं। इस से हमारी नींद तो गड़बड़ हो ही जाती है, कमरे में या घर में और जो प्राणी सोए पड़े हैं उनकी नींद भी हराम हो जाती है। दु:स्वप्न  क्यों आते हैं? इस संबंध में मनोविज्ञान की पुस्तकों में कई सिद्धांतों का ब्यौरा मिलता है। कोई कहता है कि जागृत की दबी हुई वासनाएं ही निद्रा में स्वप्न का रूप धारण करती हैं। किसी के प्रति क्रोध या बैर हमने पाल रखा हो तो संभव है सपने में हम उनसे झगड़ते हुए अपने को पाएं। आचार्य विनोबा जी ने महागुहा में प्रवेश नामक अपनी पुस्तक में इस  संबंध में जो संक्षिप्त चर्चा की है उस में दु:स्वप्नों से छुटकारा पाने के लिए कुछ सरल व व्यवहारिक उपाय बताए हैं। 

दिन भर काम कर के शरीर पूरा थक गया तो लेटते ही नींद  आएगी-

गहरी नि:स्वप्न। दिनभर काम पूरा हुआ, इस समाधान से शांत निद्रा आती है। दीर्घ श्वासोच्छवास से काम, क्रोध, विचार, चक्र, सब खत्म होते हैं। दीर्घ श्वासोच्छवास एक मिनट में  12 तक जाना चाहिए। नाम स्मरण। खाने के बाद तुरंत न सोएं। पेट में क्रिया चलती रहेगी तो नींद नहीं आएगी। इन उपायों पर जरा विचार करें। दिन भर काम करने वाले जो  श्रमिक हैं, वे रात के भोजन के बाद आराम की नींद सोते हैं लेकिन धनी मानी व्यक्ति जो प्राय: कोई विशेष शारीरिक श्रम नहीं करते, केवल कुछ घंटों का बौद्धिक कार्य ही करते हैं।  इनमें से कुछ या तो शारीरिक व्यायाम करते हैं या वॉली बाल, फुटबाल जैसे कुछ ऐसे खेलते हैं। जिन से शरीर थक जाता है।
ऐसे व्यक्ति भी चैन की नींद सोते हैं। जो कोई शारीरिक व्यायाम या खेल कूद नहीं करते, उन्हें नींद मुश्किल से आती है।

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