पालघर में फिर भूकंप के झटके

पालघर
पालघर में शुक्रवार की सुबह 11:00 बजे फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। पालघर जिले के कई भागों में भूकंप के ये झटके महसूस किए गए। लोग घरों से बाहर निकल आए। लोगों में दहशत छा गई। पालघर में पहला झटका सुबह 11.15 और 11.17 बजे महसूस किया गया। इन झटकों के बाद लोग घरों से बाहर आ गए। रिस्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई। फिलहाल भूकंप से किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नही मिली। प्राप्त जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर अंदर था। गौरतलब है कि पालघर में इस साल 2019 में तीनों ही महीनों में भूकंप आ चुके हैं। 20 फरवरी को भी पालघर में एक दिन में तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
बता दें कि पालघर जिले के डहाणू और तलासरी तालुका के लोगों की इन दिनों नींद हराम हो गई है। यहां पिछले 11 नवंबर से कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। रिस्टर स्केल पैमाने पर यह झटके बहुत चिंताजनक तो नहीं थे, लेकिन इससे लोगों में दहशत पैदा हो गई। वहीं उत्तर भारत के कई शहरों में भी इसी दिन सुबह भूकंप के हल्के  झटके महसूस किए गए। रिस्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.0 थी।

क्यों आते हैं भूकंप
पृथ्वी बारह टैस्टोनिक प्लेटों पर स्थित है, जिसके नीचे तरल पदार्थ लावा के रूप में है। ये प्लेटें लावे पर तैर रही होती हैं। इनके टकराने से ही भूकंप आते हैं। टैस्टोनिक प्लेट्स  अपनी जगह से हिलती रहती हैं और खिसकती भी हैं। हर साल ये प्लेट्स करीब 4 से 5 मिमी तक अपने स्थान से खिसक जाती हैं। इस क्रम में कभी-कभी ये प्लेट्स एक-दूसरे से  टकरा जाती हैं, जिनकी वजह से भूकंप आते हैं। बता दें कि दिल्ली जोन-4 में आता है, जबकि मुंबई और कोलकाता जोन-3 में है। यह अलग बात है कि अब तक देश के प्रमुख  शहरों में शुमार दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। दिल्ली भूकंप जोन-4 में स्थित है, ऐसे में यहां पर भूकंप आने की ज्यादा संभावना है। ऐतिहासिक  संकेतों के मुताबिक एक भयानक भूकंप कभी भी आ सकता है। यह सबक बिहार में 1934 और असम में 1950 में आए भूकंप से मिलता है। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, 1950 के  असम के भूकंप ने हिमालय में एक बड़े भूकंप की जमीन तैयार कर दी है। इस भूकंप के बाद 65 साल बीत गए हैं और संभव है कि कोई विकराल भूकंप आने ही वाला हो।
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