बाजार मे दुसरे दिन गिरावट जारी

मुंबई
शेयर बाजारों में सोमवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 355 अंक से अधिक का गोता लगाकर 38,000 अंक के नीचे बंद हुआ। नरमी की आशंका में वैश्विक  स्तर पर बिकवाली का घरेलू बाजार में बैंक और रीयल्टी कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा। तीस शेयरों वाला सेंसेक्स शुरूआती कारोबार में गिरावट के साथ 38,016.76 अंक पर खुला और पूरे कारोबार के दौरान गिरावट में रहा। कारोबार के दौरान बिकवाली दबाव से एक समय यह 37,667.40 अंक के न्यूनतम स्तर तक चला गया।
हालांकि, अंत में लिवाली से नुकसान की कुछ भरपाई हुई और सेंसेक्स 355.70 अंक यानी 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 37,808.91 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में दो कारोबारी  सत्रों में 575 अंकों की गिरावट आ चुकी है। एनएसई का निफ्टी सूचकांक भी एक समय 11,400 अंक के नीचे 11,311.60 अंक के न्यूनतम स्तर तक चला गया। अंत में यह  102.65 अंक यानी 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 11,354.25 अंक पर बंद हुआ। कारोबारियों के अनुसार पिछले सप्ताह अमेरिका तथा यूरोप से कमजोर आर्थिक आंकड़ें वैश्विक  नरमी की आशंका जताते हैं। अमेरिका तथा चीन के बीच व्यापार संबंधी तनाव से भी चिंता बढ़ी है। एशिया के ज्यादातर अन्य बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा। यूरोपीय बाजारों में  भी शुरूआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष 2018-19 के समाप्त होने से पहले निवेशकों ने निवेश पोर्टफोलियो थोड़ा कम रखने को तरजीह दी। इस  बीच, अस्थाई आंकड़ों के अनुसार घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने शुक्रवार को 657.37 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर बेचे जबकि विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध रूप से लिवाल  रहे और 1,374.57 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। जियोजीत फाइनेंशियल के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि वैश्विक आर्थिक नरमी को लेकर चिंता बढ़ने का घरेलू शेयर बाजारों  पर असर पड़ा ... निवेशक अपनी स्थिति मजबूत करते दिखे और यह व्यापक स्तर पर देखा गया।
मझोली एवं छोटी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा। अमेरिकी बांड पर रिटर्न कम हुआ है €योंकि अमेरिका में नरमी की आशंका से निवेशकों का जोखिम लेने का जज्बा  कमजोर पड़ा है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में यह स्थिति देखने को मिल सकती है। हालांकि घरेलू वृहत आर्थिक भावना मजबूती बनी हुई है। तेल कीमतों में स्थिरता तथा  कंपनियों के बेहतर वित्तीय परिणाम की उम्मीद में एफआईआई प्रवाह में वृद्धि तथा स्थिर सरकार बनने की संभावना बाजार में मजबूती को प्रतिबिंबित करती है।
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