प्रदेश भर में महाशिवरात्रि की धूम

कुंभ में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी


प्रयागराज
एक ओर जहां प्रदेशभर के सभी मंदिरों में धूमधाम से महाशिवरात्रि मनाई जा रही है, वहीं प्रयागराज में चल रहे कुंभ के आखिरी स्नान के लिए संगम के तट पर आस्था का सैलाब  उमड़ पड़ा। सोमवार सुबह 10 बजे तक तकरीबन 40 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। शाम तक यह आंकड़ा और बढ़ने के करीब एक करोड़ लोगों के संगम में डुबकी लगाने  का अनुमान है। इसी के साथ सोमवार को कुंभ का समापन भी हो जाएगा। एक दिन पहले ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया है। सुबह से लाखों श्रद्धालु पूरे  संगम क्षेत्र में 8 किलोमीटर के दायरे में बने स्नान घाटों पर अब तक स्नान कर चुके थे।
लगातार श्रद्धालुओं का रेला कुंभ की ओर चला आ रहा है। खास तौर पर मेले में कई किलोमीटर पैदल चलने के बावजूद लोगों के चेहरे पर कहीं थकान नहीं दिखाई दी। मेला अधिकारी  विजय किरन आनंद ने बताया कि सोमवार को 60 लाख से एक करोड़ लोगों के संगम में डुबकी लगाने का अनुमान है। कुंभ के अंतिम स्नान पर्व के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली  गई थीं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलने वाले प्रयागराज कुंभ मेला में धार्मिक भावना और आस्था के साथ-साथ कई भव्य मानक बने।  यह कुंभ मेला अनेक विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए भी जाना जाएगा। कुंभ में विशाल जनमानस ने गंगा में स्नान कर सात्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त किया। नागाओं को देखने वालों  की भारी भीड़ रही, तो अखाड़ों वाले से टर में हमेशा चहलपहल दिखी। इससे ये तो पता चलता है कि धर्म की इस बनावट और बसावट से लोग अभी भी अनभिज्ञ हैं। इस बार कुंभ में  सामाजिक रूढ़ियां टूटी। एक ओर दलित महामंडलेश्वर बना और उन्होनें अपनी जाति या समाज के लोगों को नई परंपराओं से जोड़ा। किन्नर अखाड़े को जूना ने अपना अंग बनाकर  शाही स्नान में साथ रखा। साथ ही शैव और वैष्णव अखाड़ों में बंधुता के कई उदाहरण दिखे।
प्रयाग कुंभ मेले में 10 हजार स्वच्छता कर्मियों ने झाड़ू लगाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। कुंभ के दौरान प्रयागराज विश्व का  एकमात्र ऐसा शहर  बना, जहां 503 बसों की परेड एकसाथ कराई गई। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल भी किया गया। इस साल के कुंभ में आध्यात्मिकता के रंग में पूरा प्रयागराज रंगा हुआ था,  लेकिन इस धार्मिक आध्यात्मिकता में स्वच्छता और विकास का भी संगम था जो अपने आप में एक मिसाल है।
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