अमेठी में विकास के मुद्दे के साथ ही फिर भावनाएं बनेंगी हथियार

अमेठी
गांधी-नेहरू परिवार के गढ़ माने जाने वाले अमेठी पर सबकी निगाहें लगी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहां से फिर से मैदान में हैं, तो भाजपा की ओर से स्मृति ईरानी के दुबारा  चुनाव लड़ने की चर्चा है। अभी उनके नाम की आधिकारिक घोषणा बाकी है, जबकि राहुल गांधी की उम्मीदवारी कांग्रेस घोषित कर चुकी है। सपा-बसपा गठबंधन इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दावा कर रहे हैं कि भाजपा इस बार अमेठी भी जीतेगी। इसकी वजह यह भी है कि भाजपा की स्मृति ईरानी पिछला चुनाव राहुल गांधी से हारने के  बावजूद अमेठी में सक्रिय रहीं। शायद यही वजह है कि भाजपा यहां मजबूत प्लेटफार्म होने का दावा कर रही है। कोई दो राय नहीं कि अमेठी को विकास की सड़क पर दौड़ाने की
शुरुआत कांग्रेस के नुमाइंदों ने ही की। अमेठी में पहली बार लोकसभा चुनाव 1967 में हुए और कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी यहां से सांसद बने, लेकिन यहां गांधी-नेहरू परिवार की  एंट्री हुई सन् 1977 के चुनाव में...संजय गांधी उम्मीदवार थे, लेकिन संजय गांधी चुनाव हार गए। हालांकि अगले चुनाव में उन्होंने फिर ताल ठोंकी और संसद पहुंचे। इसके बाद शुरू  हुआ क्रम अब तक जारी है और उस परिवार का कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं हारा है। सिर्फ 1998 में कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को ही हार देखनी पड़ी है। दरअसल इसके पीछे  बड़ी वजह गांधीनेहरू परिवार का अमेठी के लोगों से भावनात्मक लगाव बताया जाता है।
सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर रहने वाले लोगों का यहां के लोगों से आसानी से घुल-मिल जाना, लोगों को बरबस ही जोड़े रहता है। इस भावनात्मक रिश्ते के बलबूते ही विपरीत हालात  में भी अब तक फतह मिलती रही है। गांधी-नेहरू खानदान के लोगों की पहचान यहां नाम से कम भैया- दीदी, भाभी इन्हीं रिश्तों से है। यही भावनात्मकता ही रही कि इसकी काट में  स्मृति ने भी अपने पिछले चुनाव में आते ही अमेठी से बहन का रिश्ता जोड़ा। विभिन्न मंचों से उन्होंने इस रिश्ते की दुहाई दी। वह अमेठी में दीदी नाम से ही लोकप्रिय हैं।  राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2014 में मार्जिन कम होने का असर है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही। पहली ही सूची में राहुल को बतौर  प्रत्याशी घोषित कर पार्टी ने उनके कहीं और से लड़ने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। राहुल की टीम व कांग्रेस के वर्कर लगातार बैठकें कर चुनावी तैयारी भी शुरू कर चुके हैं।  हाल ही में हुई एक रैली में पीएम मोदी सहित भाजपा के दिग्गज लोगों की मौजूदगी ने अमेठी को लेकर भाजपा की गंभीरता को भी दिखा दिया है। विश्लेषकों की मानें तो पीएम व  सीएम के भाषणों से स्मृति की उम्मीदवारी भी लगभग साफ होती दिखी है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी ही है, लेकिन चुनाव की तैयारियों में भाजपा भी  दमखम से जुटी है। सीएम व पीएम के बाद 24 को भाजपा युवाओं का सम्मेलन कराने जा रही है।1967 से लेकर अब तक चार साल को छोड़कर बाकी कांग्रेस का ही अमेठी में  सांसद रहा। उसमें भी 37 साल तक तो गांधी-नेहरू परिवार के वे लोग रहे जो सत्ता की धुरी के रूप में पहचान रखते थे। इस दरम्यान अमेठी का विकास भी खूब हुआ। छह एनएच,  नवरत्न कंपनियां एचएएल, बीएचएएल, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान विमानन विश्वविद्यालय, पेट्रोलियम इंस्टीटयूट, सीआरपीएफ सेंटर जैसे तमाम संस्थानों के जरिए अमेठी को विश्वपटल पर स्थापित करने की कोशिश की गई। रेल, स्कूल, ऊसर सुधार, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य के तमाम इंतजाम भी कांग्रेस द्वारा अपने विकास कार्यों की फेहरिस्त में गिनाए  जाते हैं। महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ना, दुग्ध डेयरी बनवाना, सचल स्वास्थ्य सेवा आदि के माध्यम से कांग्रेस ने लोगों को आगे बढ़ाने का काम किया।
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