आतंक को चीन का साथ

वॉशिंगटन
पुलवामा आतंकी हमले के बाद आतंकी संगठन जैश- ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र  सुरक्षा परिषद में अड़ंगा लगा दिया है। यह चौथा मौका था, जब चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को गिरा दिया, लेकिन इस बार सुरक्षा परिषद के सदस्य अन्य विकल्पों  पर भी विचार कर सकते हैं। चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन भारत के लिए यह बड़ी बात है कि अन्य 4 स्थायी सदस्यों, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस, ने मसूद पर  बैन का समर्थन किया।
सुरक्षा परिषद के जिम्मेदार सदस्यों ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अपनी इस नीति पर ही कायम रहता है, तो भी अन्य कार्रवाइयों पर विचार किया जा सकता है।  सुरक्षा परिषद के एक डिप्लोमैट ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा, ''यदि चीन इस प्रस्ताव को रोकने की नीति जारी रखता है तो अन्य जिम्मेदार सदस्य सुरक्षा परिषद में अन्य  एक्शन लेने पर मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।’’ डिप्लोमैट ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि चीन की ओर से मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट  घोषित करने के प्रस्ताव पर अड़ंगे के बाद अन्य सदस्यों की यही राय है।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इसके बाद अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन  ने अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पेश किया था।

अमेरिका ने कहा-अब भी जारी रहेंगे प्रयास :

अमेरिका ने भी इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि इस सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची को अपडेट कराने के लिए हमारे प्रयास जारी रहेंगे। भारत में अमेरिकी दूतावास के  प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सेंक्शंस कमिटी की सिफारिशों पर खुली चर्चा नहीं की जा सकती है। लेकिन, हम कहना चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में आतंकियों के नाम शामिल कराने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

तमाम प्रयासों के बाद भी बाज नहीं आया चीन :

बता दें कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो की शक्ति रखनेवाला सदस्य है और सबकी निगाहें चीन पर ही थीं, जो पूर्व में भी अजहर को संयुक्त राष्ट्र से वैश्विक आतंकवादी  घोषित कराने के भारत के प्रयासों में अड़ंगा डाल चुका था। इससे पहले भारत ने अमेरिका और फ्रांस के साथ पुलवामा आतंकी हमले के बाद कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज शेयर किए थे  ताकि मसूद के खिलाफ पुक्ता सबूत पेश किया जा सके।
अब इस मामले पर राजनीतिक आरोपप्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि कमजोर मोदी चीन के  राष्ट्रपति शी चिनफिंग से डरे हुए हैं। भाजपा ने पलटवार करते हुए पूछा-जब भारत को पीड़ा होती है तो राहुल गांधी को खुशी क्यों होती है? कांग्रेस के आरोपों पर केंद्रीय कानून मंत्री  रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि जब भारत को पीड़ा होती है, तो राहुल गांधी को खुशी क्यों होती है? इसके अलावा उन्होंने कहा कि राहुल के चीन  के साथ अच्छे संबंध हैं। चौथी बार अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने की कोशिश की थी। यह फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन का प्रस्ताव था। यह भारत की कूटनीतिक जीत  है।

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