धारा 370 और 35ए को लेकर पवार दें स्पष्टीकरण : तावडे

मुंबई
शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने राकांपा प्रमुख शरद पवार से धारा 370 और धारा 35ए के बारे में स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा कि इन धाराओं के बारे में उनके क्या विचार है? आज आतंकवाद की समस्या देश को खोखला करने में लगी हुई है और यदि धारा 370 और धारा 35ए को खत्म किया जाता है, तो कश्मीर की समस्या बड़ी ही आसानी से हल हो सकती  है। जब तक इन दोनों धाराओं को नहीं हटाया जाएगा, कश्मीर की समस्या जस की तस रहेगी। आतंकवाद को प्रेरित करने वाला पाकिस्तान को भी लग रहा है कि इन दोनों धाराओं  को खत्म नहीं करना चाहिए। अब चुकी कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा है कि वह इन दोनों धाराओं को समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। ऐसे पक्ष से गठबंधन और  समर्थन करने वाले राकांपा प्रमुख शरद पवार का इन दोनों धाराओं और देश के प्रति क्या भूमिका है? इस पर उन्हें अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए, ऐसा विनोद तावड़े का मानना है।  सीताराम येचुरी ने कहा है कि यह महागठबंधन नहीं, बल्कि तोड़क-मोड़क गठबंधन है। उनके अनुसार पूरे देश में भाजपा के खिलाफ आज भी सभी दल एक साथ नहीं है, लेकिन  चुनाव के बाद सभी दलों को एकजुट होना होगा। तावड़े ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि भाजपा की सरकार बनेगी और सभी दलों को मिलकर भाजपा के साथ लड़ाई लड़नी होगी।  शायद यह बात शरद पवार को पहले ही समझ में आ गई है, इसलिए वे चुनाव मैदान से पीछे हट गए हैं। चुनाव में पैसे के दम पर वोट खरीदना कांग्रेस का मुख्य हथियार है, लेकिन  अब वे पैसे छापेमारी में अटक गए हैं और कांग्रेस की हालत खराब हो चुकी है। इसके लिए लोग सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस मामले में चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है कि छापेमारी में सरकार का कोई हाथ नहीं है। इनकम टैक्स विभाग को जानकारी मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। फारूक अब्दुल्ला के बयान पर शरद पवार ने कहा था कि वे  फारूक अब्दुल्ला को लेकर भाजपा के विचारों से सहमत नहीं है। इस पर तावड़े ने कहा कि शरद पवार को याद करना चाहिए कि जब उन्होंने दो बार कांग्रेस छोड़ी, उस वक्त उन्होंने  कांग्रेस के बारे में क्या बयान दिए थे? उसी तरह से आज फारूक अब्दुल्ला भाजपा गठबंधन एनडीए को छोड़ चुके हैं और उनके विचार भी शायद शरद पवार की तरह बदल सकते हैं।

जनता को इमोशनल ब्लैकमेल कर रहे हैं पवार

लोकसभा चुनाव में अब जाति के आधार पर लोग वोट नहीं देने वाले हैं। यह बात अच्छी तरह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार को समझ में आ गई है। इसीलिए  उन्होंने मतदाताओं से जाति के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी के लिए मतदान करने और गठबंधन के उम्मीदवार को विजयी बनाने की अपील की है। शरद पवार के इस  वक्तव्य पर टिप्पणी करते हुए शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि पवार के मुंह से यह श द सुनकर लोगों को असलियत समझ में आ रही है कि इसके पीछे उनका मकसद क्या  है। लोगों को अच्छे से पता है कि शरद पवार सत्ता के लोभ के लिए कभी भी किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर किसी भी हद तक जा सकते हैं। यदि शरद पवार को मिट्टी की  इतनी ही चिंता होती, तो वे शिरूर का उम्मीदवार जाति के आधार पर नहीं देते थे। अजित पवार अभी तक के सभी चुनाव में साम, दाम, दंड, भेद का उपयोग कर चुके हैं। लोकसभा  चुनाव के दौरान उनकी क्लिप भी वायरल हुई थी जो शरद पवार को देखना चाहिए, उसके बाद किसी पर टीका टिप्पणी करना चाहिए। आज कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ-साथ  अन्य बड़ी पार्टियां गठबंधन में शामिल है और वे सभी जाति के आधार पर वोट की राजनीति करती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के मेनिफेस्टो में मुस्लिमों के तीन तलाक जैसे शरिया कानून  को फिर से लागू कर मुस्लिम महिलाओं को अंधकार में धकेलने का वादा किया गया है। एक तरफ जहां शरद पवार जाति के आधार पर वोट बैंक की राजनीति करते हैं, वहीं दूसरी  तरफ तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं को फिर से अंधकार में धकेलने की राजनीति कर रहे हैं।

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