इस बार कमजोर रहेगा मान्सून

नई दिल्ली
इस बार जून से लेकर सितंबर के बीच देश के कई इलाकों में कम बारिश होने की संभावना है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एक निजी एजेंसी स्काईमेट ने कहा कि इस साल  मानसून में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। ऐसे में इस बार खेती पर असर पड़ सकता है। अगर बारिश कमजोर होती है तो फिर कर्ज के बोझ में डूबे किसानों के लिए यह  दोहरी मार होगी। इससे न केवल किसानों की आर्थिक बदहाली बढ़ सकती है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई में भी इजाफा हो सकता है।

इतनी होगी बारिश

एजेंसी ने बताया कि मानसून के  दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 93 फीसदी रहने की संभावना है। दरअसल एलपीए की 90-95 फीसदी बारिश सामान्य से कम वाली श्रेणी में आती  है। 1951 से 2000 के बीच हुई कुल बारिश के औसत को एलपीए कहा जाता है और यह 89 सेमी है।

अलनीनो का रहेगा प्रभाव

स्काईमेट के सीईओ जतिन सिंह ने संभावित सामान्य से कम बारिश के पीछे की वजह अलनीनो को बताया है। स्काईमेट के पूर्वानुमान के मुताबिक सामान्य से कम बारिश की 55  फीसदी संभावना है।

शेयर बाजार में कमजोरी

इससे देश के भीतर अच्छी कृषि और 2.6 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी वाले देश में इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमानों को झटका लग सकता है। इस खबर के बाद शेयर बाजार लाल  निशान में आ गया, जो इससे पहले मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था। भारत में साल भर होने वाली बारिश में मानसून सीजन का योगदान लगभग 70 प्रतिशत रहता है और  एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी में कृषि क्षेत्र की सफलता के लिहाज से यह खासा अहम है।

फरवरी की तुलना में बदला अनुमान

फरवरी में स्काईमेट ने कहा था कि इस साल मानसून की बारिश सामान्य रह सकती है। भारत सरकार के मौसम विभाग ने बीते महीने कहा था कि इस साल मानसून अच्छा रहने  का अनुमान है, जिसमें अलनीनो के बारे में कुछ खास बात नहीं की गई थी।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget