सुशील कुमार शिंदे ने मांगा पवार का आशिर्वाद

मुंबई
महाराष्ट्र के सोलापुर से चुनावी मैदान में उतरे पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने बुधवार को ऐलान किया कि यह उनका आखिरी लोकसभा चुनाव है।  उन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार का आशीर्वाद मांगा। शिंदे 1970 के दशक से पवार के संपर्क में हैं जब शिंदे पुलिस उपनिरीक्षक थे। सुशील कुमार शिंदे  ने पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर में कांग्रेस और एनसीपी कार्यकर्ताओं से कहा कि यह मेरा आखिरी चुनाव है। मैं पवार साहब का आशीर्वाद चाहता हूं।
उन्होंने हमेशा मुझे सहयोग दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे के खिलाफ बीजेपी के जयसिद्धेश्वर स्वामी और दलित नेता प्रकाश आंबेडकर की चुनौती है। शिंदे पिछले लोकसभा चुनाव में  बीजेपी के शरद बनसोड से हार गए थे।
शिंदे ने 1974 में सोलापुर जिले के कर्मला निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद उन्होंने 1978, 1980, 1985 और 1990 में चार बार विधानसभा चुनाव जीता। उन्होंने राज्य के वित्त मंत्री के रूप में भी सेवाएं दीं। शिंदे ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और 1978 में शरद पवार के  नेतृत्व में प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट में शामिल हुए। हालांकि 1980 में वह कांग्रेस में पुन: शामिल हो गए। वह 2003 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2004 में विलासराव देशमुख के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद सुशील कुमार शिंदे को राज्यपाल के रूप में आंध्र प्रदेश भेजा गया। शिंदे 2012 में केंद्रीय गृहमंत्री बने। शिंदे ने जनवरी 2014  में पवार को अपना 'राजनीतिक गुरू’ बताया था और कहा था कि एनसीपी प्रमुख को प्रधानमंत्री के रूप में देखकर उन्हें बहुत खुशी होगी।
प्रधानमंत्री पर नहीं करूंगा निजी हमला : पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री मोदी के बयानों पर पलटवार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं अपनी मां द्वारा दिए गए संस्कारों से प्रभावित हूं।  निजी आलोचना हमारी संस्कृति में उचित नहीं बैठती। साथ ही, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को राकांपा के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। दरअसल हाल ही में मोदी ने वर्धा में  चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इसमें उन्होंने पवार पर तीखे हमले किए और दावा किया कि राकांपा प्रमुख ने प्रतिकूल स्थिति देखते हुए लोकसभा चुनावों से अपना नाम वापस  ले लिया। पवार की पार्टी पर से पकड़ ढीली हो रही है और उनके भतीजे के चलते उपजे पारिवारिक कलह से पार्टी कमजोर पड़ गई है। पवार ने कहा कि वह मोदी पर निजी तौर पर  हमला नहीं करेंगे, भले ही मोदी ने ऐसा किया हो। उन्होंने कहा कि मोदी जहां भी जा रहे हैं, वहां निजी हमले कर रहे हैं, लेकिन निजी हमला हमारे संस्कारों का हिस्सा नहीं है।

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