काले धन पर शिवसेना का प्रहार

मुंबई
काले धन को लेकर शिवसेना ने एक बार चिंता जताई है। वर्ष 2014 के चुनावों में मोदी ने आश्वासन दिया था कि विदेशों में पड़े काले धन को देश में लाएंगे, लेकिन कालाधन की गंगोत्री तो देश में ही भ्रष्टाचार के रूप में बह रही है। इस गटर रूपी गंगा में सभी डुबकी लगा रहे हैं। चुनाव के इस माहौल में 'आयकर’ विभाग ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। ऐन  चुनाव में आयकर और ईडी छापेमारी को सही ठहराते हुए शिवसेना के मुखपत्र ने लिखा है कि चुनावी कार्यकाल तथा अन्य मौकों पर सरकार उनका राजनीतिक हथियार के रूप में  इस्तेमाल करती रही है, इसलिए उनके खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार किसी दल के पास नहीं है। चुनाव में सिर्फ राजनैतिक दल नहीं उतरते बल्कि 'आयकर’, 'ईडी’ को भी उतारा  जाता है और खेल में रोमांच पैदा किया जाता है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना’ में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी पर आयकर की छापेमारी पर लिखा है कि  उनके यहां करोड़ों रुपए की नकदी मिली है। उसकी गिनती संभवत: चुनाव का आखिरी चरण खत्म होने तक यह गणना जारी रहेगी। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले 'नोट’बंदी का निर्णय  हुआ और राजनीतिक दलों के पास जो नकदी है, वो कचरा बन जाए तथा चुनाव में किसी के पास भी पैसे की ताकत न हो, इसी मकसद से नोटबंदी की गई, ऐसा आरोप उस समय  लगा था। मायावती, अखिलेश यादव, चंद्राबाबू नायडू जैसे सरकार विरोधी लोगों पर अब आयकर विभाग तथा 'ईडी’ के छापे पड़े हैं।
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 'अब न्याय होगा’ का नारा दिया है। अब जब कांग्रेस से जुड़ी मंडली पर आयकर विभाग का छापा पड़ने के बाद 'अब हो रहा है अन्याय’ का शोर  मचाया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं के खाते में 72,000 रुपए जमा करने की योजना घोषित की है, लेकिन उसके लिए पैसा कहां से लाएंगे, पूछने पर वे  कहते हैं अनिल अंबानी, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी आदि लोगों ने देश कैसे लूटा तथा नरेंद्र मोदी के कारण ही इन लोगों को हजारों करोड़ रुपए का लाभ कैसे हुआ, यह बताते हैं। अब  उन्हें इस लिस्ट में कमलनाथ और उनके करीबियों का नाम भी लेना होगा। सत्ता बचाने के लिए कुछ भी करो, यही हमारे लोकतंत्र का मंत्र हो गया है। सरकार की ओर से मशीनरी  का गलत इस्तेमाल हो रहा है और विरोधियों पर दबाव डालने के लिए छापे मारने का आरोप पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब किया है। सच, तो यह है कि ममता  बनर्जी यह आरोप लगाएं आश्चर्यजनक ही है। सरकारी मशीनरी का राजनीतिक दुरुपयोग विरोधियों को खत्म करने के लिए यदि सर्वाधिक कहीं पर हुआ तो वह तमिलनाडु और  पश्चिम बंगाल में हुआ, ऐसा इतिहास कहता है। अंतत: हमारे देश में लोकतंत्र सिर्फ नाम का ही होता है, जिसके हाथ में खरगोश वही शिकारी, यही हमारे लोकतंत्र का असली चेहरा  है। विरोधियों पर छापा यह हमेशा की बात है। छाती पीटने से क्या होगा? ये न खत्म होनेवाला खेल है। कल जो ओखली में थे, वे आज सूप में हैं और सूप के लोग ओखली में हैं।  चुनाव आयोग अब क्या करेगा?
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