बच्चे में विनोदप्रियता जगाएं

जीवन में अगर हंसना मुस्कुराना न होता तो सोचिए जीवन कितना ऊबाऊ होता। इंसान महज रोबोट की तरह ही जीता और बगैर जिंदगी को शिद्दत से जिए एक दिन संसार से
कूच कर जाता।
हंसने से उम्र बढ़ती है, ऐसा माना जाता है। चिंता तो चिता समान है। चिंतित रहकर किसी भी समस्या का समाधान नहीं मिलता। कई लोग स्वभाव से ही विनोदी होते हैं, कई हमेशा तनावग्रस्त रहते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? €या यह महज जींस का परिणाम है? लेकिन प्रकृति की कमी को इंसान अपनी सूझ-बूझ से जितना संभव हो, दूर कर सकता है। इसकी  शुरूआत बचपन से ही होनी चाहिए। बच्चे के चिड़चिड़े होने के कई कारण हो सकते हैं। उनमें से मां-बाप की उसके प्रति लापरवाही ही मुख्य कारण है। बच्चे में विनोदप्रियता जगाने से  पहले आपको स्वयं अपने को देखना है। आप में भी यह गुण भरपूर है या नहीं। नहीं है तो स्वयं को सुधारें। बच्चे को लाड़ दुलार करने में कभी कंजूसी न बरतें। प्यार सिर्फ अहसास  ही नहीं होना चाहिए। उसे उजागर भी करें। बच्चे को उछाल, उसे बांहों में, पैरों पर झूला-झुला, गुदगुदी कर उसे भरपूर हंसायें। उसी की तोतली भाषा में बात करने में हर्ज नहीं। इससे  बच्चे के साथ 'रेपो’ बनाने में मदद मिलती है। प्रशंसा किसे अच्छी नहीं लगती। प्रशंसा की भूख बालक को भी होती है। शाबाशी देने पर देखेंगे उसके चेहरे पर कैसी चमक आ जाती  है। आपका प्रोत्साहन बच्चे में आत्मविश्वास जगाता है। बच्चे की उसके दोस्तों से कभी तुलना न करें। 'निटू को देखो, कितना होशियार है। एक तुम हो, कभी अच्छे नंबर लाते ही  नहीं।’ या 'गुप्ता का अरूण देखो हमेशा खेलकूद में प्राइज लेकर आता है। तुम तो हर काम में पीछे ही रहते हो।’ इस तरह की नकारात्मक बातों व आलोचनाओं से बच्चे  में हीन भावना पनपने लगती है। फिर वह हंसना बोलना भूल उदासी से घिर जाता है। अपने पर से उसका विश्वास ही उठने लगता है। बच्चों को मामूली सी असफलता पर घुड़के डांटें नहीं,  बल्कि प्यार से समझाएं कि अगर वह थोड़ी मेहनत और करता तो उसका परिणाम कितना सुखद होता। आप अपनी हैसियत के मुताबिक इनाम का वादा भी बच्चे से इन्सेंटिव के रूप  में कर सकते हैं। बच्चे का मन जीतना कोई मुश्किल काम नहीं है। इसमें बच्चे के साथ आपका भी उतना ही फायदा है। बच्चे पर रौब छांटने की गलती कभी न करें। उसका अहम्  संतुष्ट हो, इसका ध्यान लगातार रखें। याद रखिए, बच्चे में भी अहम् बड़ों से कम नहीं होता।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget