पाक को दिखावे से ज्यादा कुछ करना होगा

अपनी आंतरिक आर्थिक दुर्दशा से बेहाल पाकिस्तान का यह बयान कि प्रधानमंत्री मोदी की दोबारा सरकार बनती है, तो वह शांति के लिए अच्छी बात होगी, उसका एक ऐसा प्रयास  है, जिसकी बदौलत वह अपनी आतंक के कारोबार की छवि सुधारना चाहता है। कारण इस छवि ने उसे दुनिया में अलग- थलग कर दिया है और आज उसकी साख इतने नीचे है कि  कोई भी पश्चिमी देश या वहां के संस्थान उसे कर्ज देने को भी तैयार नहीं हैं। उसका एक मात्र शुभचिंतक चीन, जिसकी उसे संभालना एक तरह से मजबूरी है, मदद कर रहा है। खाड़ी  देश भी मदद करते हैं, परंतु वहां भी हमने मोदी काल में मजबूत घेराबंदी की है और अपनी पैठ बनाई है, तो वहां से भी वह मदद नहीं मिल पा रही है, जिसकी पाक को दरकार है।  आज उसके पास दो महीने तक काम चलाने भर को विदेशी मुद्रा है। जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमत आसमान छू रही हैं। ऐसे में उसके सत्ता प्रमुख का ऐसा बयान एक  कोशिश है। जिसे हम दिखावा भी कह सकते हैं कि दुनिया यह जाने कि पाक अपने दुश्मनों के लिए भी कितना दिलदार है, इसे भले ही हमारा विपक्ष प्रधानमंत्री के खिलाफ एक  हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है और उन पर तोहमतें लगा रहा है, परंतु देश का नागरिक इतना नादान नहीं है, उसे पता है कि पिछले तीन दशक में यह पहली बार है, जब  पाक हमले होने का दिवास्वप्न देख रहा है और उसकी उन वाचाल नेताओं की जबान बंद है, जो हमेशा अणुशक्ति होने का दंभ भरते रहते थे, आतंकी भेजते थे और इसके बाद  कश्मीर में आजादी की लड़ाई चल रही है ऐसा ढोंग करते थे। यह प्रधानमंत्री मोदी सरकार की आक्रामक नीतियों और सेना के पराक्रम का प्रतिफल है कि पाक को अपनी औकात पता  चल गई। वह दो दिन हमें नहीं झेल सकता और अब उसे दिन में तारे नजर आ रहे हैं। कारण उसे पता है कि भारत मोदी युग में सिर्फ चेतावनियां ही नहीं देता, कार्रवाई करता है  और उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देती है और पाकिस्तान की, तो तबसे नीद गायब है। युद्ध की भाषा बोलना, गीदड़ भभकी देना आसान होता है, परंतु जब सामने से सही ट€कर हो, तो बड़े-बड़े की बोलती बंद हो जाती है। जब उनका आका चीन डोकलाम की लाग डांट के बाद और उसमें पटखनी खाने के बाद सावधान हो गया है और अब वह सब करना बंद  कर दिया है, तो पाक की €या औकात, जो हमको चंद दिन भी नहीं झेल सकता। शांति की आकांक्षा भी रखो और धोखा देते भी रहो, यह अब नहीं चलेगा, अब या तो आतंक का  कारोबार बंद करो या उसके परिणाम भुगतने को तैयार रहो औए वह लड़ाई तु्हे केवल मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति के हर मोर्चो पर लडनी पड़ेगी। आज पाकिस्तान उसी गति को  पहुंचा है ,जिसने 1971 के युद्ध बंदियों के बारे में सही जानकारी नहीं दी, जिसने कुल भूषण जाधव के मामले में कूटनीतिक शुचिता और परंपरा का पालन नहीं किया €या वह हमारी  पायलट को दो दिन में छोड़ता है। यह हमारे प्यार में नहीं किया, बल्कि इस एहसास से हुआ है कि इस बार भारत से पंगा भरी पड़ेगा। कारण भारत ने अब निर्णायक कदम उठाने  का फैसला ही नहीं किया, बल्कि दो-दो बार करके दिखाया है जिसे पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यस्था और उसकी स्वनाम धन्य सेना नहीं झेल सकती। पाक को जबरन कŽजाई  कश्मीर के तिस्ते को छोड़ना होगा और वह चाहे खालिस्तान को पुन: जिंदा करने का कुत्सित प्रयास हो या आतंक का निर्यात हो उस पर और उसके यहां चल रहे आतंक के कारखाने  पर स्थाई रोक लगानी होगी और हमारे यहां के जो अपराधी वहां छिपे हैं, उन्हें हमें देना होगा, तभी बात बनेगी, इसलिए हमारी सरकार वही कह रही है, पाक सिर्फ बात ना कारे  धरातल पर कर के दिखाए कि वह सही राह चल रही है और हमेशा की तरह ढोंग नहीं कर रहा है। अब भारत कोई भी नापाक हरकत बर्दाश्त करने और समय देने को तैयार नहीं।

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