निर्यातकों के समक्ष नगदी की कमी बड़ी चुनौती : फियो

नई दिल्ली
सरंक्षणवाद, जिंस वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और नकदी की कम उपलब्धता निर्यातकों के लिए तीन प्रमुख चुनौतियां है, जिनका सामना उन्हें आने वाले महीनों में करना  होगा। निर्यातकों के प्रमुख संगठन फियो ने यह बात कही। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) पहले ही चेतावनी दे  चुका है कि वैश्विक व्यापार में वृद्धि 2019 में कम रहने की उम्मीद है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि ऐसा लगता है कि संरक्षणवाद आने वाले दिनों में बढ़ेगा और  यह वस्तुओं की  वैश्विक मांग को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि जिंसों के दाम में उतार-चढ़ाव और पर्याप्त नकदी नहीं होने के कारण ऋण उपलब्ध नहीं होना भी दो बड़ी  चुनौतियां हैं। दरअसल, बैंक निर्यातकों को कर्ज देने में ज्यादा उत्सुकता नहीं दिखा रहे हैं, जिसके चलते निर्यातकों को पर्याप्त ऋण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सहाय ने कहा कि इन  चुनौतियों से देश के निर्यात पर असर पड़ेगा। हमें इन चुनौतियों से आगे बढ़ने की जरूरत है। सरकार की ओर से समय पर सहयोग मिलने से इन चुनौतियों से निपटने में मदद  मिलेगी। सहाय ने सुझाव दिया कि बैंकों को कर्ज देने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, क्योंकि इससे ऋण की प्रक्रिया आसान होगी। डब्ल्यूटीओ ने 2019 में  वैश्विक व्यापार में 3.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। बाद में इसे संशोधित कर 2.6 प्रतिशत कर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा र तार से भारत का वस्तु निर्यात 2018-19  में बढ़कर 330 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। देश का निर्यात कारोबार अप्रैल -फरवरी 2018-19 के दौरान 8.85 प्रतिशत बढ़कर 298.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि इस अवधि में  आयात 9.75 प्रतिशत बढ़कर 464 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2011-12 से भारत का निर्यात 300 अरब डॉलर के आसपास रहा है। वर्ष 2017-18 में यह 10 प्रतिशत  बढ़कर 303 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले 2013-14 में यह 3015 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। निर्यात बढ़ने से देश में रोजगार सृजन, विनिर्माण को बढ़ावा देने और  अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलती है।
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