संघों के आपसी टकराव में खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाना गलत : सेहवाग

नई दिल्ली
अपने जमाने के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सेहवाग ने खेल संघों की मान्यता और गैरमान्यता को मसला बनाकर खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के चलन का कड़ा विरोध करते हुए  बुधवार को उम्मीद जतायी कि खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ और राष्ट्रीय खेल संघ भविष्य में इस मामले में सकारात्मक रवैया अपनाएंगे।
सेहवाग ने गुरुवार को इंडो  इंटरनेशनल प्रीमियर कबड्डी लीग (आईपीकेएल) का लोगो जारी किया, जिसका पहला चरण 13 मई से शुरू होगा। इस लीग को भारतीय ओलंपिक संघ  और राष्ट्रीय संस्था से मान्यता हासिल नहीं है, जिससे इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर संशय बना हुआ है, लेकिन सेहवाग ने खिलाड़ी को हर नई लीग में खेलने  का मौका देने की वकालत करते हुए इस संदर्भ में 2007 में भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) में खेल रहे खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को भी गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। उन्हें हर लीग में खेलने की अनुमति मिलनी चाहिए। बाकी जिसे भी खेल मंत्रालय मान्यता देगा वह भारतीय टीम का चयन करेगा, लेकिन आपको किसी भी तरह की घरेलू लीग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी का ही चयन करना चाहिए। किसी खिलाड़ी को  प्रतिबंध करने से उस खिलाड़ी और देश को नुकसान होगा। सेहवाग से पूछा गया कि क्या बीसीसीआई ने आईसीएल में खेल रहे खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाकर गलत किया था,  उन्होंने कहा कि वह गलत था लेकिन उसे बाद में हटा दिया गया था लेकिन वैसा नहीं होना चाहिए था।
आईपीएल में खेल रहे खिलाड़ियों को नीलामी राशि के अलावा राजस्व का 20 प्रतिशत शेयर भी मिलेगा और सेहवाग ने प्रत्येक खेल में इस तरह की व्यवस्था करने का समर्थन  किया। सेहवाग ने कहा कि यह खिलाड़ी की स्थायी कमाई हो जाती है और वह सुनिश्चित रहता है कि उसे कम से कम इतनी धनराशि मिलेगी। क्रिकेट में हमने इसके लिये लड़ाई  लड़ी और हमें कुल राजस्व का 26 प्रतिशत (13 प्रतिशत अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों और 13 प्रतिशत घरेलू खिलाड़ियों) मिलता है।
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