कांग्रेस का आरोप, अंबानी ने बताया गलत

नई दिल्ली
फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद की भारत की घोषणा के बाद अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशन्स की एक अनुषंगी के 14.37 करोड़ यूरो (करीब 1,125  करोड़ रुपए) का कर माफ किया था। फ्रांस के एक प्रमुख समाचार पत्र ला मोंदे ने शनिवार को इस खबर का प्रकाशन किया है। अखबार की खबर के मुताबिक रिलायंस कम्युनिकेशन  की संबद्धी अनुषंगी कंपनी फ्रांस में पंजीकृत है और दूरसंचार क्षेत्र में काम करती है। रिलायंस कम्युनिकेशन ने इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया में किसी भी तरह के गलत काम से  इंकार किया है। कंपनी ने कहा है कि कर विवाद को कानूनी ढांचे के तहत निपटाया गया। उन्होंने कहा कि फ्रांस में काम करने वाली सभी कंपनियों के लिए इस तरह का तंत्र उपलब्ध  है। फ्रांस के समाचारपत्र ने कहा है कि देश के कर अधिकारियों ने रिलायंस  लैग अटलांटिक फ्रांस से 15.1 करोड़ यूरो के कर की मांग की थी, लेकिन 73 लाख यूरो में यह मामला  सुलट गया। इस समाचार पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कर मामले और राफेल के मुद्दे में किसी तरह का संबंध स्थापित करना पूरी तरह अनुचित, निहित उद्देश्य  से प्रेरित और गलत जानकारी देने की कोशिश है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, हम ऐसी खबरें देख रहे हैं, जिसमें एक निजी कंपनी को कर में दी गई छूट एवं भारत सरकार  द्वारा राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के बीच अनुमान के आधार पर संबंध स्थापित किया जा रहा है। ना तो कर की अवधि और ना ही रियायत के विषय का वर्तमान सरकार के  कार्यकाल में हुई राफेल की खरीद से दूर-दूर तक कोई लेना-देना है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में 10 अप्रैल, 2015 को फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के  साथ बातचीत के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा की थी। कांग्रेस इस सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है। विपक्षी दल ने आरोप लगाया है  कि सरकार 1,670 करोड़ रुपए की दर से एक विमान खरीद रही है, जबकि तत्कालीन संप्रग सरकार ने प्रति विमान 526 करोड़ की दर से सौदा पक्का किया था। कांग्रेस अनिल  अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस डिफेंस को दसाल्ट एवियशन का ऑफसेट साझीदार बनाने को लेकर भी सरकार पर हमालवर है। सरकार ने आरोपों को खारिज किया है। समाचार  पत्र ने कहा कि फ्रांस के अधिकारियों ने रिलायंस  लैग अटलांटिक फ्रांस की जांच की और पाया कि 2007-10 के बीच उसे छह करोड़ यूरो का कर देना था। हालांकि मामले को  सुलटाने के लिए रिलायंस ने 76 लाख यूरो की पेशकश की लेकिन फ्रांस के अधिकारियों ने राशि स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

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