जेटली का कांग्रेस पर पलटवार

नई दिल्ली
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व पीएम राजीव गांधी को 'भ्रष्टाचारी नंबर वन' वाले कॉमेंट पर अब चौतरफा बयानों की आंधी शुरू हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन  प्रियंका गांधी के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने इस पर पीएम मोदी को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने 1989 में उस विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार को  समर्थन दिया था, जिसने राजीव को अतिरिक्त सुरक्षा देने से इंकार कर दिया था। पटेल ने पीएम मोदी के बयान को कायरता की निशानी बताई। उधर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोप  पर जवाब में देने में देरी नहीं लगाई और उसकी मंशा पर ही सवाल उठा दिए। भाजपा नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पटेल के आरोपों का जवाब दिया और ट्वीट कर कहा कि  'दिसंबर 1990 से मई 1991 तक, जिस दौरान राजीव गांधी की हत्या की गई उस दौरान कांग्रेस केंद्र में चंद्रशेखर सरकार का समर्थन कर रही थी।'
जेटली ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि 'मई 1991 से 2004 तक कांग्रेस राजीव गांधी की हत्या के लिए अपनी मौजूदा सहयोगी डीएमके को जिम्मेदार ठहराती थी। यहां तक कि इसने  संयुक्त मोर्चा सरकार से इसी आधार पर समर्थन भी वापस लिया था। 28 साल बाद आज कांग्रेस को इसमें भाजपा की भूमिका नजर आ रही है।'

अहमद पटेल ने क्या कहा था
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने राजीव गांधी की हत्या के लिए भाजपा को कठघरे में खड़ा करते हुए ट्वीट किया था, 'राजीवजी ने उनकी घृणा की वजह से अपनी जान गंवाई  और वह हमारे बीच उन पर लगाए गए निराधार आरोपों और गालियों का जवाब देने के लिए नहीं हैं।' एक और ट्वीट में पटेल ने कहा कि 'एक शहीद प्रधानमंत्री को गाली देना  अत्यंत कायरता की निशानी है। लेकिन उनकी हत्या के लिए जिम्मेदार कौन था? भाजपा समर्थित वीपी सिंह सरकार ने उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा देने से इंकार कर दिया था और  विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं व बार-बार किए गए अनुरोधों के बावजूद सिर्फ एक पीएसओ मुहैया कराया गया था।'

राजीव गांधी की हत्या के वब्त चंद्रशेखर थे केयरटेकर पीएम
राजीव गांधी की 21 मई 1991 को उस वक्त हत्या हुई थी जब वह तमिलनाडु के श्रीपेरांबुदुर में चुनावी कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे। उस वक्त देश में चुनाव चल रहे थे और चंद्रशेखर कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे। चंद्रशेखर 10 नवंबर 1990 को कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन बाद में राजीव गांधी द्वारा समर्थन वापसी की घोषणा के बाद  चंद्रशेखर को छह मार्च 1991 को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उनकी सरकार अपना पहला बजट भी नहीं पेश कर पाई थी। बाद में चुनाव संपन्न होने तक चंद्रशेखर 21 जून  तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे थे।

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