जेट संकट के कारण पहली बार गिरा देश का घरेलू एयर ट्राफिक

नई दिल्ली
अप्रैल महीने में देश में घरेलू एयर ट्रैफिक में गिरावट आई है। ऐसा पिछले छह सालों में पहली बार हुआ है। इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट असोसिएशन (आईएटीए) ने अपनी रिपोर्ट में  इसकी वजह जेट एयरवेज के बंद होने और अन्य कारणों से फ्लाइट कैंसलेशन के बढ़ते मामले की वजह से हुआ है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने रिपोर्ट में कहा कि वास्तव में भारत का   एयरलाइंस ट्रैफिक सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत गिरा है। यह जेट एयरवेज के बंद होने का असर है। छह साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि इस वर्ष अप्रैल महीने में साल भर  पहले इसी महीने की तुलना में डोमेस्टिक ट्रैफिक में गिरावट आई है। दुनियाभर के 209 एयरलाइंस आईएटीए के सदस्य हैं जो वैश्विक एयर ट्रैफिक के 82 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व  करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थाई रूप से दहाई अकों में रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर (आरपीके) ग्रोथ हासिल करने के बाद भारत का घरेलू बाजार जनवरी 2014 के बाद पहली   बार नेगेटिव ग्रोथ दर्ज किया है। अप्रैल 2019 में भारत का आरपीके अप्रैल 2018 के मुकाबले 0.5 प्रतिशत कम रहा। दिसंबर 2018 में भारत के डोमेस्टिक मार्केट ने सालाना आधार  पर 15 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की थी।
रिपोर्ट आगे कहती है कि पिछले पांच वर्षों में भारत का घरेलू एयर ट्रैफिक औसतन करीब 20 प्रतिशत की गति से बढ़ा। इसने कहा कि अचानक आई गिरावट का प्रमुख कारण जेट  एयरवेज का बाजार से बाहर होना है। दूसरी किसी एयरलाइन ने जेट से खाली हुई बड़ी जगह को नहीं भरा है। इससे ऐवलेबल सीट किलोमीटर (एएसके) ग्रोथ में भी बड़ी गिरावट आई  है और यह सालाना आधार पर महज 0.5 प्रतिशत रह गई है जो पिछले दो वर्षों के दौरान करीब 15 प्रतिशत रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के महीनों में हवाई किराया   बढ़ने का भी पैसेंजर डिमांड पर असर हुआ
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