सातत्यता के साथ बदलाव

प्रधानमंत्री ने अपनी चिरपरिचित थीम सातत्यता के साथ बदलाव की राह पर चलते हुए मंत्रिमंडल में भी इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि इसमें नए पुराने का सुंदर संयोजन हों  और समाज के हर क्षेत्र का, हर वर्ग का उसकी आवश्यकता और क्षमता के अनुसार प्रतिनिधित्व हो। इसमें अनुभव और युवाजोश का सुंदर संयोजन है, जो प्रधानमंत्री के नारे की  अनुरूप सबका साथ सबका विकास सुनिश्चित करने और सबका विश्वास जीतने के उनके लक्ष्य को पूरा करेगा। काम की धमक यदि नीचे तक पहुंचे, तो उसका क्या असर होता है।  यह इन चुनाव परिणामों ने देश को ही नहीं विश्व को दिखा दिया है। विपक्ष आज तक हार के इस बवंडर से उबर नहीं पाया है और अभी भी गोल-गोल घूम रहा है। कारण उसने  कभी यह नहीं सोच था कि देश में ऐसे परिणाम भी आ सकते हैं। देश के संविधान में धर्म निरपेक्षता शब्द का मतलब सभी धर्मों को समान अधिकार और सभी को अपनी पूजा- अराधना अपने तरीके से करने की छूट।
जिसका अर्थ हमारे अधिकांश दलों ने अल्पसंख्यक प्यार और बहुसंख्यक निरादर लगाया, पिछले चुनाव में मोदी की सफलता से ऐसी और जाति आधारित सोच पर सवाल खड़ा हुआ  था। उसकी चूले हिली थी, परंतु उसके मानने वालों का विश्वास जाति और अल्पसंख्यक खेल से नहीं टूटा था। इस बार मोदी के नेतृत्व में भाजपा की विजय ने इस सोच के महल को  भरभरा कर गिरा दिया। सिर्फ अपने उस सोच के बदले, जिसमें सबका साथ और सबका विकास की बात को प्रमुखता ही नहीं दी गई, बल्कि विकास के फल कैसे लक्षित वर्ग तक  पहुंचे उसकी खबरदारी ही नहीं बरती गई, बल्कि पहुंचाया गया। आतंकवाद का सामना करने में कड़ी नीति की सिर्फ बातें नहीं की गई, बल्कि ऐसा करके दिखाया गया कि पाक की  सासं अब तक बंद है और चीन हमें हड़काने की गीदड़ भभकी देने की हिमाकत नहीं करता।  यहां तक कि चंद दिन पहले बांटने वाले की उपाधि देने  वाली टाइम पत्रिका अब मोदी  को महान जोड़ने वाले की रूप में देख रही है और यही सच है। मोदी युग में सिर्फ जोड़ने का काम हुआ है। गांव-गांव सड़क से जुड़ रही हैं, गांव-गांव में बिजली पहुंची है, वादों,  जातियों की सोच से अलग हटते हुए देश के गरीब तबके चाहे वह सवर्ण हो यानि सबको मुख्यधारा में लाने का प्रयसा हुआ है। साफ- सफाई पर नए सिरे से जोर दिया गया है।  संक्षेप में देश के समग्र विकास की पहल ही नहीं की गई, काम होता दिख रहा है और जो हर वर्ग को छू रहा है और इसी नीति और इसी आशा के साथ आम लोगों ने मोदी को भर- भर मत दिया है कि अब देश का सही विकास होगा, देश को कोई बाहरी ताकत परेशान नहीं कर पाएगी और हर आदमी का मान-सम्मान सुरक्षति होगा। हममें जो सही है आदिकाल  से लेकर आज तक उसका बिना संकोच डंका बजेगा और जो कई बातें हमें 21वीं सदी का प्रगत राष्ट बनाने के लिए जरूरी है अब की जाएंगी और मोदी की नई टीम ऐसा करेगी ऐसा  भरोसा है और इसकी बानगी गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह में देखने को मिली है, जो मोदी युग के हर काम की तरह ऐतिहासिक है, दुनिया हमें देखने की दृष्टि बदल रहा है और  देशवासियों को भी अब देश प्रगति पथ पर चलता ही नहीं दौड़ता दिख रहा है, जबकि अतीत में बातों से पेट भरता था। अब काम से पेट भरता है।

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