मराठा विद्यार्थियों के पीजी मेडिकल में प्रवेश को लेकर सरकार गंभीर : चंद्रकांत पाटिल

मुंबई
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल में एडमिशन से वंचित रहने वाले मराठा समाज के विद्यार्थियों के साथ अन्याय नहीं होगा। विद्यार्थियों के  न्याय के लिए राज्य सरकार प्रयत्न कर रही हैं। बुधवार को मंत्रालय में पत्रकार परिषद के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल में प्रवेश को  लेकर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने जो फैसला दिया था, उसे राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चैलेंज किया था, लेकिन कुछ टेक्निकल कारणों से सर्वोच्च  न्यायालय ने अपील खारिज कर दी। पाटिल ने कहा कि देश कानून और संविधान से चलता है, यह बात सभी को मालूम है लेकिन मैं सभी विद्यार्थियों को आश्वस्त करता हूं कि  उनके साथ अन्याय नहीं होगा। चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल में प्रवेश की तय सीमा को सात दिन से बढ़ाकर सरकार ने 10 दिन कर दिया है। साथ ही  विद्यार्थियों को न्याय मिल सके इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राज्य का कोटा को बढ़ाने की मांग की है। चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि विद्यार्थियों की  बढ़ती समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर समस्या का हल निकालने के लिए आचार संहिता में छूट मांगी है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को पोस्ट  ग्रेजुएट मेडिकल में प्रवेश से वंचित मराठा समाज के 293 विद्यार्थियों के माता-पिता और कुछ नेताओं के साथ इस विषय पर हमने बैठक की, जिसमें उनसे इस समस्या से निजात  पाने के लिए उनकी राय मांगी है। बता दें कि 2019 में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के रिक्त 972 सीटों में से 213 सीटें मराठा समाज के आरक्षण के अंतर्गत उन्हें मिलनी थी,  लेकिन मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने इस बारे में निर्णय देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन में मराठा विद्यार्थियों को आरक्षण नहीं मिलेगा।
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