अब बच्चों में भी कमर दर्द की समस्या

लगातार एक ही स्थान पर बैठे रहने के कारण बच्चों की रीढ़ की हड्डियों में विकार उत्पन्न होने की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है, जिससे हड्डियां कमजोर होकर  टूटने लगी हैं। ब्रिटिश चेयरोप्रेक्टिस एसोसिएशन के अनुसार घंटों तक टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने झुककर बैठने एवं भारी बस्तों की वजह से बच्चों में कमर दर्द की शिकायत  में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। डॉ€टरों के अनुसार एक स्थान पर अधिक समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या के कारण हड्डियों एवं मांसपेशियों की कसरत नहीं हो  पाती।
जब इन कमजोर हड्डियों पर भारी बस्ता एवं अन्य भारी सामान उठाने से दबाव पड़ता है, तो हड्डियों के क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है। स्कूल जाने वाले 200 स्कूली बच्चों  पर किए गए एक शोध से यह पता चला कि एक सप्ताह में लड़के औसतन 41 और लड़कियां औसतन 21 घंटे टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने गुजारते हैं। बहुत सारे बच्चे लेट   कर या आड़े-तिरछे बैठकर टीवी देखते हैं। डॉ. टॅयूनर के अनुसार पेट के बल लेटकर सिर पीछे की ओर उठाए रखने से गर्दन एवं रीढ़ के निचले भाग के जोड़ों पर अत्यधिक दबाव  पड़ता है, जिससे उनमें दर्द उत्पनन्न होता है। बच्चों के कमर दर्द का मुख्य कारण एक स्थान पर अधिक समय तक बैठे रहना एवं व्यायाम का अभाव है, जिसके कारण उनकी  मासंपेशियां अच्छे से काम नहीं करती, जब उन्हें भारी बस्ते उठाने पड़ते हैं, तो उनमें दर्द उत्पन्न न हो जाता है। बच्चों द्वारा बस्तों को सही तरीके से न उठाया जाना भी इस  समस्या को और जटिल बना देता है। शोध से पता चला है कि 44 प्रतिशत बच्चे बस्ता उठाने के लिए दोनों पट्टों का प्रयोग नहीं करते हैं। चेयरोप्रैक्टिस एसोएिशन द्वारा कराए गए  शोध के प्रमुख डॉ. स्काट मिलर के अनुसार अधिकांश बच्चे अपना ज्यादातर समय एक स्थान पर बैठे हुए गुजारते हैं। व्यायाम के अभाव में उनकी हड्डियों में मजबूती नहीं आ  पाती। उनके अनुसार 1000 में से लगभग 52 प्रतिशत बच्चों की रीढ़ की हड्डियों में फ्रेक्चर पाए गए हैं। इनमें से बहुत सारे यह सोच कर दर्द को नजरअंदाज कर जाते हैं कि उनकी  पीठ में सामान्य तौर पर दर्द रहता है। जैसे-जैसे इनकी उम्र बढ़ती जाती है, समस्या और अधिक विकराल रूप धारण करती जाती है।

- उमेश कुमार साहू

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