पोस्ट ग्रॅज्युएट मेडिकल एडमिशन - प्रवेश के लिए फिर से होंगे दो राउंड

मुंबई
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल पोस्ट ग्रेज्युएट कोर्स में मराठा आरक्षण की राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नागपुर बेंच द्वारा दिए गए फैसले को  बरकरार रखा है। गुरुवार को राज्य सरकार ने कहा कि पोस्ट ग्रेज्युएट मेडिकल प्रवेश का पहला और दूसरा चरण फिर से होगा और तीसरे चरण के बाद जिन छात्रों को प्रवेश नहीं  मिले सकेगा, उनके लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार से कोटा बढ़ाने की मांग करेगी। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर कैबिनेट उपसमिति का नेतृत्व करने वाले सार्वजनिक लोक निर्माण  मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने गुरुवार शाम को मंत्रालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि किसी भी अदालत ने मराठा समुदाय और एसईबीसी कोटा के तहत नौकरियों और प्रवेश में 16  फीसदी आरक्षण को रद्द नहीं किया है। पाटिल ने बताया कि नीट की अधिसूचना 3 नवंबर 2018 को जारी हुई थी, जबकि राज्य सरकार ने मराठा आरक्षण का निर्णय 30 नवंबर को  लिया था। उनका कहना है कि नीट नोटिफिकेशन का यह कतई मतलब नहीं है कि प्रवेश प्रक्रिया शुरु हो चुकी है और राज्य सरकार ने फरवरी 2019 में चिकित्सा प्रवेश की  अधिसूचना निकाली है, इसलिए राज्य सरकार की राय है कि एसईबीसी कोटा दिए जाने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन प्रक्रिया शुरू हुई है। पाटिल ने बताया कि पूर्व एडवोकेट जनरल श्रीहरि  अणे ने संबंधित मामले में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, हालांकि यह मामला पहले से ही बंबई हाईकोर्ट में लंबित है। पाटिल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कहा  गया है कि राज्य सरकार प्रवेश प्रक्रिया पर आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि मेडिकुल एजुकेशन विभाग पहले ही स्थिति की समीक्षा कर चुका है और इस अनुसार पहले और दूसरे  दौर की प्रवेश प्रक्रिया को फिर से किया जाएगा और प्रवेश का तीसरा दौर जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है, उसे भी पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को पूरा होने के  बाद राज्य सरकार को पता चलेगा कि एसईबीसी कोटे के तहत कितने छात्रों लाभान्वित हुए थे और आज के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें प्रवेश से वंचित किया जाएगा। पाटिल  ने कहा कि अनुमान है कि 30 से 35 छात्र को प्रवेश नहीं मिल सकेगा, यह आंकड़ा बदल भी सकता है, ऐसे में राज्य सरकार इस साल केंद्र सरकार से कोटा बढ़ाने की मांग करेगी। पीजी मेडिकल में 300 एडमीशन होते हैं और 200 छात्र एसईबीसी कोटे के बिना प्रवेश पा सकेंगे। 100 छात्रों में 30 से 35 मराठा समुदाय के छात्र हैं, जो आज सुप्रीम कोर्ट के फैसल  की वजह से प्रवेश से वंचित रह जाएंगे। सरकार इस साल कोटा बढ़ाने की पूरी कोशिश करेगी और अगले साल से एसईबीसी के 16 फीसदी आरक्षण के तहत प्रवेश में कोई दिक्कत  नहीं आएगी।

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