विनाश काले विपरीत बुद्धि

विनाश काले विपरीत बुद्धि, यह कहावत हमारे पड़ोसी पाकिस्तान पर पूरी तरह फिट बैठती है। अभी चंद दिन नहीं बीते कि उसके सरजमीं पर पल रहे दुर्दांत और कुख्यात आतंकी  संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर पाबंदी लगी है और उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है। इसके बावजूद एक अमेरिकी रपट में यह खुलासा किया गया कि पाक का निजाम और  विशेषकर उसकी सेना और खुफिया एजेंसी, जिनके मुंह आतंक को राजनय के रूप में इस्तेमाल करने का खून लग चुका है, इस रास्ते को बदलने को तैयार नहीं है और तालिबान के  कुछ तत्वों को शामिल कर जैश-ए-मुतकी नामक एक और संगठन की भर्ती शुरू हो गई है। मतलब साफ है कि पाकिस्तान हमारे आक्रामक तेवर और दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक जिसने  उसकी घिग्घी बंद की है और दुनिया का ऐसा विरोध जिसके सामने चीन को भी नत मस्तक होना पड़ा और मसूद अजर को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया से भी कोई सबक नहीं  ले रहा है। आर्थिक बदहाली और कटोरा लेकर दुनिया में घूमने की नौबत और आतंक के मुद्दे पर दुनिया का बहिष्कार झेलते रहे राष्ट्र की यदि यह सूरते हाल है, तो फिर उसका रक्षा कोई नहीं कर सकता। वह एक ऐसे जंगली शेर की तरह व्यवहार कर रहा है, जिसके मुंह आदमी का खून लग जाता है वह अन्य शिकार छोड़ कर सिर्फ मनुष्य की ताक में रहना  लगता है और जिसका एक मात्र इलाज उसकी दुनिया से रुखसत में होता है। पाक भी उसी राह पर जा रहा है। विडंबना यह है कि आतंकी कारोबार की नीति पर टिकने का उसका  हठ उसे कहीं का नहीं छोड़ रहा है, इसके चलते उसकी रियाया अकथनीय यातनाएं झेल रही है। आए दिन होने वाले आतंकी हमले में उसके भी निर्दोष लोग जान गवां रहे हैं, लहू  लुहान हो रहे हैं। इसके बावजूद कट्टरता और आतंक के कारोबार का तिरस्कार करने की बजाय उसे किसी न किसी तरह से बरकरार रखने और पाल-पोसकर दुनिया की शांति को  बाधित करने का कारनामा न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि हमारे देश सहित दुनिया के शांति के लिए बड़ा खतरा है। दुनिया में कहीं भी कोई आतंकी घटना क्यों न हो, उसके  तार किसी न किसी तरह पाकिस्तना से जरूर जुड़े मिलते हैं, जबकि धन सउदी सहित उन कई देशों का लगा हुआ मिलता है, जिनके यहां से जकात का काफी पैसा दुनिया भर में   मदरसों पर लगता है। अभी हाल में श्रीलंका में रची गई फसाद को खाद पानी इन मदरसों के माध्यम से ही उपलब्ध कराई गई है। ऐसा सामने आ रहा है और इसीलिए श्रीलंका की  सरकार उनपर काफी सख्त भी हुई है।
ऐसे में हमारे प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य काफी सार गर्भित है कि पाक से यह उम्मीद करना कि एक-दो सर्जिकल स्ट्राइक के बाद वह सुधर जाएगा, सही नहीं है। यह पूरी तरह अब  सामने आ रहा है। इस परिदृश्य में हमने अब जो पाकिस्तान के किसी भी कुकृत्य के खिलाफ जीरो टोलेरेंस के नीति अपनाई है। वह वक्त की मांग है। कारण ऐसे लोग सिर्फ वैसे ही   चीज से डरते है जिसे हम डंडे के नाम से जानते हैं। जब इन्हें यह पता होगा कि एक डंडे पर चार पड़ेंगे और घर में घुसकर कर पड़ेंगे और इन्हें यह एहसास होगा कि कहीं छिपने   को नहीं मिलेगा, तभी यह सही रहेंगे। परिणामत: जब तक यह सच्चे अर्थों में दुनिया के जिम्मेदार और सभ्य देशों की तरह स्थापित तौर तरीकों के साथ अपना काम नहीं करते और  आतंक के कारोबार और उसकी धौंश के बल पर अपनी चाल बंद नहीं करते। तब तक इनके प्रति किसी भी तरह की ढिलाई की जरूरत नहीं है। यह तभी सही राह पर आएंगे, जब  अपनी गलती से कहीं ज्यादा सजा प्राप्त करते रहेंगे। कारण इनकी चमड़ी काफी मोटी है, यह बार-बार साबित हो रहा है।

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