इसे देश हाथोंहाथ ले रहा है

किसी भी देश की, अपनी संस्कृति होती है, जो उसकी पहचान होती है, आज जिन्हें हम दुनिया का प्रगत राष्ट्र कहते है। इस विंदु पर यह हमसे बहुत पीछे है। दुर्भाग्य से हमारा देश  लंबे समय तक विदेशी शासन में रहा। पहले मुस्लिम और बाद में पुर्तगाली से लेकर डच और अंग्रेज तक आए पर टिके सिर्फ-सिर्फ अंग्रेज कारण उन्होंने वहीं तक हस्तक्षेप करने की  नीति अपनाई, जो शासन प्रशासन की दृष्टि से जरूरी था बाकी चलने दिया, परंतु उन्होंने अपने आचार-व्यवहार और शासन से ऐसा संदेश दिया कि वह बहुत श्रेष्ठ हैं और हमारी पूरी  सामाजिक व्यवस्था पर ही एक तरह से प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया और अपने शिक्षा सुधारों से ,अपने शासन की नीतियों से ऐसा माहौल पैदा किया कि हमारे ही देश के लोगों या  उनसे संर्पक में आया पढ़ा लिखा तबका को अपना सब कुछ खराब लगने लगा। कारण हमारे यहां सांस्कृतिक एकता थी, परंतु ऐसा कोई राजनैतिक शक्ति तब तक नहीं उदित हो पाई  थी, जिसका शासन पूरी देश में हो। कला, विज्ञान,दर्शन साहित्य तकरीबन हर विधाओं में हमारे यहां काम हुए थे और तब हुए थे, जब आज के अधिकांश प्रगत राष्ट्र अस्तित्व में ही  नहीं थे। हां ये जरूर है कि कालांतर में तमाम ऐसी कुरीतियां हमारे बीच पनपीं, जिनके चलते समाज एक स्थान पर जाकर रुक गया, जिसका फायदा अंग्रेजों ने उठाया और उनसे  प्रभावित हमारे लोगों ने भी उनकी और उनकी रीति-नीति के जय जयकार शुरू की और जिसे महात्मा गांधी ने बखूबी समझा और इसीलिए उन्होंने अग्रेजों से लड़ाई में हमारे समाज में  व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष जरूर किया। जाति प्रथा, छुआछूत का विरोध करने के साथ गांव को आत्मनिर्भर बनाने और स्वभाषा विकास और स्वदेशी पर जोर दिया। साफ- सफाई पर बल दिया और इस उर्वर धरा के ही दर्शन से अहिंसा और सत्याग्रह का ऐसा अस्त्र तैयार किया कि जिसके सामने वह राज भी भौंचक हो गया है, जिसके राज में कभी सूर्य  अस्त नहीं होता था। बाद में यह अभियान उनकी हत्या के साथ थम सा गया। कारण अंग्रेजी माहौल में पढ़े-लिखे सियासतदा अपना अतीत भूल इन मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित  करना खुद का अपमान समझने लगे। जिनको उठाना देश के लिए देश के स्वाभिमान के लिए जरूरी था। गांधी के बाद यह काम आरएसएस के विश्वविद्यालय से पारंगत वह सख्त  कर रहा है, जिसका नाम नरेद्र मोदी है और जो दूसरी बार इस देश का प्रधानमंत्री बनाए जा रहे हैं और वहा भी बंपर बहुमत से उनमें एक बात वह है, जो अब तक के प्रधानमंत्रियों  से उन्हें जुदा करती है और वह है अतीत की उन चीजों को संभालना जो सुनहरी है और उन बातों को नकारना जो हमारे प्रगति में बाधक हैं रोड़ा हैं। उदाहरण के लिए योग को ही ली  लें, हमारी इस विरासत का प्रचार-प्रसार विश्व में हो रहा है। विश्व दीवाना है बाबा रामदेव के पहले भी इस दिशा में कार्य हुए हैं परंतु जो व्यापकता उन्होंने पहुंचाई कम लोगों ने  पहुंचाए है और उसको जो प्रश्रय सरकार ने दिया है। वह मोदी के पूर्व किसी सरकार ने नहीं दिया है। कुंभ का आयोजन हमेशा होता रहा। परंतु अतीत और वर्तमान का जो संगमा इस  बार सगम तट पर दिखा। वह पहले कभी नहीं हुआ। सारे काम करते हुए अपने सुनहरे अतीत के उन पहलू को जिंदा करते हुए जो हमारी सांस है। उसमें 21वीं शताब्दी के अनुसार  तŽदीली और उसको अद्यतन कलेर्वर में प्रस्तुत करना मोदी युग की देन है और जिस पर सारा देश और जहां वाह वाह कर रहा है और यही कारण है भाजपा भी बढ़ रही है और देश  में भी बढ़ रहा है। कारण मोदी अपनी संस्कृति के उन पहलुओं का भी उन्नयन चाहते हैं, जो इसे दुनिया में अनूठा बनाती है। अनुपमेय बनाती है, साथ ही 21वीं सदी की तकनीक  और वैज्ञानिक विकास के भी समर्थक है, जो दुनिया के प्रगत राष्ट्रों के समकक्ष खड़ा रहने के लिए जरूरी है और यही वहा राज है, जो उन्हें नित नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है और  नित नई सफलता दे रहा है। साफ सफाई पर जोर, कर्मठता पर जोर, ईमानदारी पर जोर अतीत के दीप स्तंभों को संभालने पर जोर आदि वे बातें हैं, जो मोदी को औरों से जुदा  करती है, अनूठा बनाती है और जिसे देश हाथों हाथ ले रहा है।

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