तेल के बदले चावल स्कीम पर संकट

नई दिल्ली
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर भारत पर चौतरफा असर पड़ रहा है। भारत और ईरान के बीच क्रूड के बदले बासमती चावल निर्यात का समझौता टूटने की कगार पर है।  अमेरिकी के प्रतिबंध की वजह से भारत ने ईरान से क्रूड यानी कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया है। इस पर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि भारत तेल लेगा तो ही वह बासमती  चावल लेगा। भारतीय बासमती निर्यातक इसी डर की वजह से अब ईरान में अपनी खेप रोक रहे हैं।

जबतक समझौता नही होगा शिपमेंट रहेंगे होल्ड पर
कोहिनूर फूड्स के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर गुरनाम अरोड़ा ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि जब तक निर्यात की शर्तों पर ईरानी सरकार के साथ नया समझौता नहीं होता, तब  तक उन्होंने शिपमेंट को होल्ड पर रखने का फैसला किया है। इसी तरह कई निर्यातक कंपनियों ने भी शिपमेंट होल्ड की है। हालांकि, अटके हुए खेप का कोई निश्चित डेटा उपलब्ध  नहीं है। गौरतलब है कि इस बार ईरान को महज 20 से 30 हजार मिलिटन ही निर्यात हो पाया है। बासमती का निर्यात लगभग एक मिलियन टन था। इस वर्ष उनका अनुमान   लगभग 1.4 मिलियन टन था, जो 40 प्रतिशत की वृद्धि थी। लेकिनअब ऐसा होना मुश्किल है।

कम हो गये चावल के दाम
भारत ईरान को अपने कुल बासमती निर्यात का लगभग 30 फीसदी भेजता है। लेकिन अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। जिससे बासमती चावल निर्यातकों के  लिए अब यह मुश्किल खड़ी हो गई है कि ईरान से किस मुद्रा में और किस तरह भुगतान प्राप्त किया जाए। इसे लेकर उन्होंने सरकार ने कुछ दिशानिर्देश देने का आग्रह किया है।  निर्यातकों की मुश्किलों की वजह से घरेलू चावल बाजार असमंजस में है। इसके चलते यहां धान के मूल्य में पांच से सात फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। हरियाणा की  मंडियों में बासमती के साथ 1,121 प्रजाति की लंबे चावल में भी गिरावट का रुख देखा गया है। मंडियों से जुड़े लोगों को लगता है कि ईरान से निर्यात प्रभावित होने का सीधा असर  घरेलू बाजार में पड़ना है। बासमती निर्यातक ईरान से ताजा निर्यात सौदा करने से बच रहे हैं।

निर्यात से प्राप्त होती है 30 हज़ार करोड़ की विदेशी मुद्रा

बासमती धान की खेती हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मप्र, छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर में प्रमुखता से होती है। चावल निर्यातकों ने वैश्विक बाजार में अब दूसरे  ग्राहकों की तलाश शुरू कर दी है। अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के मुताबिक अकेले बासमती चावल के निर्यात से 30 हजार करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। ईरान  सरकार से पिछले साल ही एक निर्यात समझौता हुआ था, जिसके तहत बासमती निर्यात के मूल्य के बराबर भारत को क्रूड ऑयल मिलना था।
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