बुआ बबुआ सब खारिज

गुरुवार को आए चुनाव परिणाम ने सबकी कमर तोड़ दी है। वह चाहे महागठबंधन हो या कांग्रेस या देश में किंगमेकर की भूमिका निभाने का ख्वाब देख रहे शरद पवार या चंद्रा बाबू 
नायडू या फेडरल फ्रंट का झुनझुना लेकर अपनी अलग बीन बजा रहे केसीआर, सबको जनता ने नकार दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने नया इतिहास रच दिया है और यह नारा साबित  कर दिया है कि मोदी है, तो मुमकिन है। काम और संगठन विस्तार का जो काम भाजपा में सरकार और संगठन दोनों स्तर पर मोदी-शाह की जोड़ी ने किया, वह अन्य दलों की  तुलना में अतुलनीय है और उसने भाजपा के खाते में ऐसा परिणाम लाए, जिसके सामने विपक्ष भौंचक्का है और उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। कारण विपक्ष अभी भी पुरानी घिसी-पिटी, रीति-नीति पर चल रहा है, जबकि शाह ने स्थानीय स्तर पर हर कार्य में पुरातन तौर-तरीकों के साथ उन सभी नवीन तौर-तरीकों को अंगीकार किया, जो  वक्त की मांग है और निहायत जरूरी है। जबकि कांग्रेस पुराने घिसे पिटे तरीकों का ही इतेमाल करती नजर आई और पिछले चुनाव के बाद से उसने जो हिंदुत्व की लाइन अपनाने  की कोशिश की वह स्वयं स्फूर्त न लगकर भाजपा की नकल ज्यादा लगी। भाजपा के पांच साल के शासन के दौरान हुए कार्यों की जो धमक निचले स्तर पर गई और जो हर वर्ग में  उसका नया मतदाता तैयार हुआ, उसका आकलन कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष नहीं कर पाया। उसने तो सरकार की कमियां गिनाने में अपना वक्त जाया किया और सपा-बसपा और  राजद जैसे दल अपनी पुरानी जातिवादी राजनीति करने पर ही दांव लगाकर चुनाव की बैतरनी पार करने का प्रयास करते नजर आए। उन्हें लगा कि सर्वत्र कैराना और फूलपुर दुहराया  जाएगा वे यह नहीं ताड़ पाए कि भाजपा ने उससे सबक लिया है और उसके बाद नए मतदाता वर्ग को आकर्षित करने के लिए काफी मेहनत की है और यह मेहनत सरकार की  योजनाओं और संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा खून पसीना बहाकर की गई है और जिसने इन सबकी कमर तोड़ दी और सबके सब भाजपा की विजयी रथ की दौड़ के आगे भूसपाट हो  गए। आज उक्त सबकी देश में और अपने-अपने क्षेत्रों में जो दुर्दशा हुई है, उसका प्रमुख कारण मोदी युग में विकास का फल चखे मतदाता को फिर जातिवाद के जाल में फंसाने के  प्रयास की विफलता है, जो देश के लिए अच्छी बात है। कारण यदि हमारा मतदाता अपने मत का प्रयोग इस आधार पर करता है कि कौन सा दल देश का सही विकास कर सकता  है कौन देश की एकता-अखंडता और अस्मिता की रक्षा कर सकता है, तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है? सौभाग्य से पिछले लोकसभा चुनाव से अब तक हुए कई चुनाव में यही  हो रहा है और यह भाजपा की नेतृत्व में हो रहा है। यह भाजपा की सबसे बड़ी सफलता है। कारण इसके बाद सभी दल इन मुद्दों की बात करेंगे। जाति और धर्म मुद्दा नहीं होगा, तो  इस कारण से जो नकारात्मकता हमारे समाज में फैलाई जा रही थी, उस पर भी अंकुश लगेगा और कालांतर में वे भी तिमिर-तिरोहित होगी। इससे भारतीय समाज और लोकतंत्र दोनों  पुष्ट होगा। अल्पसंख्यक मत की हमारे देश में अपनी एक कहानी है। कई दलों की निरपेक्षता पहनी और भोंडा किस्म का अल्पसंख्यकवाद फैलाने और अल्पसंख्यक परस्ती की  दास्तान हमें अकसर सुनाई देती है। उनका प्रदर्शन भी होता रहा है। कांग्रेस जैसे दल भी आज तक इस बिंदु का कोई समाधान नहीं ढूंढ़ पाया है और दोनों पुलों पर चढ़ाने का क्या हश्र  होता है? यह इस चुनाव परिणाम से स्पष्ट है। भाजपा ने इस मिथक को भी तोड़ा है और हमेशा सबको साथ लेने की बात की है। वह भी बिना अल्पसंख्यक मतों की परवाह किए  जिसका भी लाभ उसे चुनाव में मिला है और इसके नाम पर दुकान चलाने वाले इन समाज के पुरोधाओं को भी सोचना होगा कि अब अल्पसंख्यक होना चुनाव में यूएसपी नहीं है।  इससे भी सबका साथ सबका विकास और सबके साथ समान व्यवहार वाली बात देश के बहुमत से ज्यादा वर्ग मान रहे हो यह साबित हो रहा है और भाजपा के ऐतिहासिक सफलता  का यही राज है। परिणामत: अब महागठबंधन, कांग्रेस और अन्य उन जैसे दलों को यह समझना होगा कि अब उनके अस्त्र-सस्त्र काल वाह्य हो चुके है नहीं तो अभी सत्ता से दूर हुए  हैं कहीं ऐसा न हो कि फिर वापसी न हो। वैसे भी आज की उनकी अवस्था के मद्दे नजर अभी उनकी वापसी बहुत दूर है। कारण बुआ बबुआ सब खारिज हैं।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget