कहीं देर न हो जाए

इस समय गर्मी उफान पर है और दुनिया के सबसे गरम शहरों का कीर्तिमान हमारे कई शहर बना रहे हैं। ऐसे में लेखक अमितव घोष की यह बात की हमारे यहां के किसी भी दल  ने हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में पर्यावरण को मुद्दा नहीं बनाया काफी गंभीर और विचारोत्तेजक है। कारण अभी भी इसे लेकर हमारे देश में उतनी जागरूकता नहीं है, जितनी  होनी चाहिए और यह संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। आज भी हमारे कल-कारखाने उन मापदंडों का अनुपालन नहीं कर रहे है, जो पर्यावरण की रक्षा के लिए जरूरी है।  प्लास्टिक जो इस विन्दु का सबसे बड़ा खलनायक है और जिसे लेकर कई राज्यों ने सख्त रुख अपनाया है इस पर पाबंदी लगाई है। आज भी हमारे समाज में खतरनाक स्तर तक  उपयोग में लाया जा रहा है इसका सहज-सुलभ होना और सस्ता होने ने पर्यावरण के लिए सही उत्पादों मसलन पत्तल, कुल्हढ़ आदि को काल वाह्य कर दिया है और अब तो पानी की कमी और नीचे जाने की स्थिति उन क्षेत्रों में भी सुनाई दे रही है जो सालों-साल पानी से लबालब रहते थे और एकाध सूखे भी झेल जाते थे। वे नदियां जिनमें साल में बारहोमास  पानी रहता था। अब बारिश के बाद छह महीने में ही सूखने लगती है या उनमें पानी काफी कम हो जाता है। पेड़ पौधे, पुरातन जल संचयन और जल प्राप्ति के स्रोत्र सूख रहे हैं और अभी तक हमारा एक बड़ा वर्ग इससे होने वाले संकटों से बेखबर इस संकट को और विकराल बनाने में अपना योगदान दे रहा है। आवश्यक है कि अब हमारे राजनैतिक दल और सरकारें इस विन्दु पर और संजीदा हों। कारण शुद्ध हवा और शुद्ध पानी भोजन से ज्यादा जरूरी है और यदि वह ही नहीं रहेगा, तो बाकी सब तामझाम बेकार हो जाएंगी। इसलिए इसे  अब जन-जन का आंदोलन बनाए और जन-जन को जागरूक करने के लिए हर संभव कदम उठाने की जरूरत है। कारण समय कम है कहीं ऐसा न हो जाए कि देर हो जाए।

काल बनी शराब

हरीली शराब ने फिर एक बार उत्तर प्रदेश में लगभग दो दर्जन जिंदगियों को समाप्त कर दिया। शायद ही कोई वर्ष ऐसा गुजरता है, जब देश के किसी कोने से ऐसी विदारक घटनाओं  की खबर सामने न आए। आवश्यक है कि ऐसे वस्तुओं के क्रय-विक्रय के पहले इनके निरीक्षण-परीक्षण की ऐसी व्यवस्था हो, जिससे ऐसे पदार्थ जो जहरीले हो गए हैं, उन्हें बाजार में  जाने से रोका जा सके और इसके लिए विभाग पूरी तरह जबाबदेह हो। कारण नशाबंदी का हमरा प्रयास वह चाहे जिस राज्य में हुआ उसको वहीं के लोगों ने ही भोथरा कर दिया है।  शराब का उपभोग न हो, इसके लिए तमाम प्रयास हुए, परंतु वह इस पर रोक लगने में कामयाब नहीं होने का कारण लोग ही हैं। इसकी जानलेवा ताकत को समझकर इससे तौबा  नहीं कर रहे हैं, तो आवश्यक हो कि इसकी कुछ ऐसी व्यवस्था हो कि ऐसा जानलेवा समान बाजार में न पहुंचे। राज्य सरकार ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों और लापरवाह पुलिस  प्रशासन पर कारवाई शुरू कर दी है, जो अच्छी बात है, परंतु उसके साथ यह भी आवश्यक है कि कुछ ऐसे पुख्ता व्यवस्था भी की जाए, जिससे ऐसे उत्पाद बाजार में ही न पहुंचे।  कारण ऐसे हादसे में जान गवाने वाले तो जाते ही है। उसके साथ उसका पूरा परिवार तबाह होता है। इसलिए इसके सेवन के खिलाफ जो अभियान सरकारी गैर सरकारी स्तर पर  चलते हैं। उन्हें चलाए रखते हुए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इसके बाद भी जो शराब ठेकों पर पहुंच रही है ,वहां जहर न हो।

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