भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपी मिलिंद एकबोटे पर जानलेवा हमला

पुणे
समस्त हिंदू अघाड़ी के अध्यक्ष मिलिंद एकबोटे के साथ पुणे में मंगलवार को कुछ लोगों ने मारपीट की थी, जिसके बाद बुधवार को पंडित मोडक, विवेक मोडक सहित 40 से 45  लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मिलिंदी पुणे में 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के आरोपी हैं।
वे मंगलवार रात 9.45 बजे पुणे के सासवड में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान उनकी कार को पंडित मोडक और उनके 40 से 45  समर्थकों ने घेर लिया। उन्हें कार से निकालकर उनके साथ हाथापाई की गई। आरोप है कि मोडक के समर्थकों ने मिलिंद एकबोटे पर डंडे, पत्थर और मिर्ची पाउडर से हमला किया।  हमले में मिलिंद के साथ उनके कुछ समर्थकों को भी चोट आई है। घटना के बाद मिलिंद की शिकायत पर पुलिस ने यह केस दर्ज किया है। 56 वर्षीय मिलिंद एकबोटे का पूरा  परिवार आरएसएस से जुड़ा रहा है। वे 1997 से 2002 तक भाजपा के पार्षद भी रह चुके हैं।
हालांकि 2002 में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। 2007 में मिलिंद ने एक बार फिर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। हारने के बाद  'हिंदू एकता मंच' नामक संगठन शुरू किया। इसके बाद मिलिंद ने 2014 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा।  फिलहाल मिलिंद की भाभी पुणे महानगर पालिका में भाजपा की पार्षद हैं।मिलिंद एकबोटे पर हिंसा भड़काने, दंगा कराने और धमकी देने सहित 12 केस दर्ज हैं। बताया जाता है कि  इसमें से 5 मामलों में एकबोटे को दोषी भी करार दिया जा चुका है। भीमा-कोरेगांव हिंसा के बाद मिलिंद एकबोटे ने बयान जारी कर इस हिंसा की निंदा की है। उन्होंने ये भी दावा  किया है कि उनके संगठन में बड़ी संख्या में दलित हैं।
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