'33 करोड़ वृक्ष लगाने में सहयोग करें हर समाज के लोग'

मुंबई
राज्य के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से हो रही तापमान में वृद्धि की तीव्रता को कम करने के लिए 33 करोड़ वृक्ष लगाने की मुहिम में विभिन्न सरकारी  विभागों और जनता की भागीदारी के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं का सहभाग महत्वपूर्ण है। शनिवार को सह्याद्रि अतिथिगृह में आयोजित 33 करोड़ वृक्ष लगाए जाने के निमित्त  वृक्षारोपण अभियान को लेकर समाज के सभी प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक को संबोधित करते हुए वन मंत्री ने कहा कि हम समाज के सभी घटकों के साथ बैठक कर  उनसे वृक्षारोपण अभियान में भाग लेने की अपील कर रहे हैं।
मुनगंटीवार ने कहा कि वन और पर्यावरण क्षेत्र में योगदान करने वाले हम सभी पर्यावरण दूत हैं। इसलिए इस वृक्षारोपण अभियान में हमारी भागीदारी महत्वपूर्ण है। समाज में  वृक्षारोपण सभी का सहज भाव होना चाहिए। 'वन हैं तो जल है और जहां जल है वही मनुष्य का कल है' ऐसा कहते हुए उन्होंने कई उदाहरण देकर यह स्पष्ट किया कि जीवन की प्रगति में वनों का कितना महत्व है। आज दुनिया में किसी देश की भौतिक प्रगति के साथ-साथ उस देश का आनंद सूचकांक कितना है, इस बात को महत्व दिया जाता है। उन्होंने  कहा कि यह आनंद धन में नहीं बल्कि वन में प्राप्त होगा। उन्होंने स्पष्ट किया वृक्ष इंसान का पालन करते हैं। उन्हें ऑक्सीजन, फल, फूल और छाया देते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु  तक विभिन्न रूपों में वे हमारे साथ हैं, इसलिए हम उनमें देवता का रूप देखते हैं। हम सभी को वृक्षारोपण और वृक्षों के संरक्षण के माध्यम से इस देवता की सेवा करने का अवसर  मिला है, यह ईश्वरीय कार्य तो है ही लेकिन यह हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा स्वयंसेवी संस्थाओं को वृक्षारोपण अभियान में जो कठिनाइयां आएंगी उनको हल करने में वन विभाग के अधिकारी पूरा सहयोग करेंगे। वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा  कि राज्य में सूखे पर स्थाई रूप से जीत पाने के लिए वन संपदा महत्वपूर्ण है। इसके लिए हम सभी को इस अभियान में बड़ी संख्या में भाग लेना चाहिए। वन विभाग का हेल्पलाइन नंबर 1926 है। वन, वन्यजीव संरक्षण में इस माध्यम से वन विभाग के साथ सहयोग करें, संस्थाओं के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को हरित सेना का सदस्य बनने के लिए  प्रेरित करें। इस अवसर पर वन विभाग के प्रधान सचिव विकास खारगे, वन विभाग के अन्य अधिकारी और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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