कांग्रेस पदाधिकारियों का राकांपा पर गंभीर आरोप

मुंबई
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस पार्टी को मिली करारी हार से निराश पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपने सहयोगी दल राकांपा पर गंभीर आरोप  लगाते हुए आगामी विधानसभा चुनाव अलग लड़ने की मांग पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से की है। दादर स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में हुई पार्टी नेताओं और जिलाध्यक्षों की बैठक में  कांग्रेस के पदाधिकारियों ने राकांपा पर आरोप लगाया कि एक तरफ जहां राकांपा के उमीदवारों को जिताने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत से काम किया, वहीं कांग्रेस पार्टी  के उम्मीदवारों के लिए काम करने की बजाय राकांपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के उम्मीदवारों को जिताने के लिए काम किया। बैठक में उपस्थित प्रदेश के प्रभारी  मल्लिकार्जुन खरगे से कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में राकांपा की बजाय पार्टी को वंचित आघाड़ी के साथ गठबंधन करना चाहिए।
इससे पार्टी को बड़ा फायदा हो सकता है। बैठक में मौजूद जिलाध्यक्षों ने पार्टी के वरिष्ठ के नेताओं से कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य सरकार के कामों को लेकर जनता के  नाराजगी है और राकांपा सहित अनेक पार्टियों के साथ गठबंधन होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी को चुनाव में उसका फायदा नहीं हुआ। आगामी विधानसभा चुनाव अलग लड़ने की मांग  करते हुए जिलाध्यक्षों ने कहा कि लोकसभा चुनाव में राकांपा ने अपने ही उम्मीदवारों को जिताने के लिए प्रयत्न किया।

अलग-अलग लड़ सकते हैं विधानसभा चुनाव
कांग्रेस पार्टी की शुक्रवार को हुई बैठक में जिस तरीके से जिलाध्यक्षों ने आगामी विधानसभा चुनाव राकांपा से अलग या वंचित आघाड़ी के साथ मिलकर लड़ने की बात पार्टी के वरिष्ठ  नेताओं से की, इससे राज्य की राजनीति में बड़ा फेरबदल की स्थिति पैदा हो सकती है। अगर सचमुच ऐसा हुआ तो आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी राकांपा के साथ नहीं  वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है। जबकि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान मनसे प्रमुख राज ठाकरे की राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ बढ़ी नजदीकियां ये दर्शाती हैं कि राकांपा और मनसे का गठबंधन हो सकता है। विशेष सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार से कांग्रेस पार्टी चिंतित है, जिसे  लेकर कांग्रेस पार्टी अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार समीक्षा बैठक आयोजित कर रही है। बैठक में जिस तरीके से पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का एक सुर में  राकांपा के खिलाफ आवाज उठना शुरू हो गया है, इससे यह स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और राकांपा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी, इसकी  कोई गारंटी नहीं है। एक तरह जहां लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा और आगामी विधानसभा चुनाव भी मिलकर लड़ेंगे, वहीं कांग्रेस और राकांपा के  बीच कुछ ठीक-ठाक नहीं होने के कारण गठबंधन टूट सकता है।
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