एक माह में दूध की थैलियों पर बैन

मुंबई
पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि दूध की प्लॉस्टिक की थैलियों पर पाबंदी एक महीने में लागू होगी। उन्होंने कहा कि दूध की थैली देते वक्त 50 पैसे  डिपॉजिट करने तथा थैली वापस करते वक्त 50 पैसे वापस करने की योजना पर सभी दूध कंपनियां राजी हो गई हैं। कदम ने कहा कि एक महीने में यह योजना शुरू होगी। राज्य में  एक दिन में 1 करोड़ दूध की थैलियां सड़कों पर आती हैं और इससे 31 टन प्लॉस्टिक कचरे का निर्माण होता है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सुनील प्रभु सहित कई अन्य  सदस्यों ने यह मामला उठाया था। इसके जवाब में रामदास कदम ने कहा कि राज्य में 1200 टन प्लॉस्टिक कचरे का निर्माण होता है। प्लॉस्टिक पर पाबंदी के बाद कचरे में 600 टन  कचरे की कमी हुई है। राज्य में आने वाला प्लॉस्टिक बाहर के राज्यों से आता है, इसमें 80 फीसदी प्लॉस्टिक गुजरात से आता है। इसे बंद करने के लिए गुजरात सीमा पर प्लॉस्टिक  लाने वाले ट्रकों पर उन्होंने खुद जाकर कार्रवाई की। राज्य में 1 लाख 20 हजार 286 टन प्लॉस्टिक जब्त किया गया और 24 कंपनियां एक दिन में 550 टन प्लॉस्टिक पर प्रक्रिया  करती हैं। कदम ने कहा कि सीमेंट कंपनियों ने 3 हजार टन प्लॉस्टिक का उपयोग किया। चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने कहा कि राज्य में अभी भी  प्लॉस्टिक का उपयोग किया जा रहा है तथा दूध की थैलियों से शहर के दृष्टिकोण से एक बड़ी समस्या है। इस बारे में सरकार क्या निर्णय ले रही है। विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार  ने कहा कि दूसरे राज्यों से बड़े पैमाने पर प्लॉस्टिक आता है। उन्होंने कहा कि रेलवे के जरिए बड़े पैमाने पर प्लॉस्टिक राज्य में आता है। कदम ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के   अधिकारियों तथा स्थानीय निकाय संस्था के प्रतिनिधियों की संयुक्त कार्रवाई में 6 हजार 369 दुकानों पर कार्रवाई की गई और 4 करोड़ 12 लाख 20 हजार 588 का दंड एकत्रित  किया गया तथा 836 टन प्लॉस्टिक का स्टॉक जब्त किया गया।

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